108 किलोमीटर लंबी सिरसा नदी का किया गया पुनरुद्धार, 49 गांवों और छह विकास खंडों से होकर गुजरती है नदी।
कभी मिट्टी के कटान और गाद के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच चुकी फिरोजाबाद की ऐतिहासिक सिरसा नदी अब एक बार फिर कल-कल बह रही है. नदी के पुनरुद्धार और कायाकल्प के लिए जिले में चलाए गए व्यापक अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. सिरसा नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए फिरोजाबाद जिले को प्रतिष्ठित 'स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है।
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में मुख्य विकास अधिकारी शत्रोहन वैश्य ने फिरोजाबाद जिले की ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किया. जिला मुख्यालय लौटने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने इस सम्मान को परियोजना को सफल बनाने में योगदान देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को समर्पित किया।
108 किलोमीटर लंबी सिरसा नदी
मुख्य विकास अधिकारी शत्रोहन वैश्य ने बताया कि सिरसा नदी फिरोजाबाद जिले की सबसे लंबी नदियों में शामिल है. यह करीब 108 किलोमीटर लंबी है और जिले के लगभग 49 गांवों से होकर गुजरती है. नदी का क्षेत्र छह विकास खंडों तक फैला हुआ है. लंबे समय तक उचित देखरेख और जल प्रवाह बाधित होने के कारण नदी का स्वरूप बदलता गया।
मिट्टी के कटान और गाद जमा होने से कई स्थानों पर नदी का तल लगभग समतल हो गया था. इसका असर नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह पर पड़ा और पानी आगे तक नहीं पहुंच पा रहा था. धीरे-धीरे नदी का बड़ा हिस्सा मृतप्राय स्थिति में पहुंच गया था।
सिरसा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन ने इसे एक अभियान के रूप में लिया. इसमें केवल सरकारी विभागों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों, ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और आमजन को भी जोड़ा गया।
अभियान के तहत राजस्व, सिंचाई, लघु सिंचाई, मनरेगा, ग्राम विकास और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) सहित विभिन्न विभागों ने मिलकर काम किया. अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमों ने नदी के पूरे स्ट्रेच की लगातार निगरानी की और आवश्यकता के अनुसार नदी की खुदाई तथा सफाई का काम कराया गया।
प्रशासन की ओर से पहले ग्रामीणों और आमजन को नदी के महत्व के प्रति जागरूक किया गया. चौपालों और प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ा गया. इसके बाद नदी के अलग-अलग हिस्सों में कार्य शुरू कराया गया।
*खुदाई से लेकर घाट और पौधरोपण तक हुआ काम*
सिरसा नदी के पुनरुद्धार के दौरान नदी की तलहटी की खुदाई कर जल प्रवाह को सुचारु बनाने का प्रयास किया गया. इसके साथ ही नदी के किनारों पर बंधों का निर्माण कराया गया. नदी के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण भी कराया गया।
जहां आवश्यकता थी, वहां घाटों का निर्माण कराया गया. इससे नदी के पुनरुद्धार के साथ-साथ ग्रामीणों को सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी सुविधाएं मिलीं।
लगातार निगरानी और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के बाद नदी में पानी का प्रवाह फिर से दिखाई देने लगा. प्रशासन के अनुसार अब सिरसा नदी में पानी निरंतर बह रहा है और कई स्थानों पर नदी अपने पुराने स्वरूप में लौटती नजर आ रही है।
*1.20 लाख से अधिक मानव दिवसों का सृजन*
सिरसा नदी पुनरुद्धार अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण रोजगार भी रहा. परियोजना के दौरान मनरेगा सहित विभिन्न कार्यों के माध्यम से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को रोजगार मिला.
प्रशासन के अनुसार अभियान के दौरान 1,20,719 मानव दिवसों का सृजन हुआ. इस तरह नदी पुनरुद्धार के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा हुए.
*भूजल स्तर में सुधार का दावा*
नदी में पानी का प्रवाह शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किए जाने की बात प्रशासन की ओर से कही गई है. नदी के पुनर्जीवित होने से किसानों को सिंचाई में लाभ मिलने लगा है.
प्रशासन का कहना है कि नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ने से आसपास के कृषि क्षेत्रों को फायदा हुआ है. इससे खेती को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने और फसलों की पैदावार में वृद्धि की संभावनाएं बनी हैं।
नदी के पुनरुद्धार से केवल किसान ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों को भी पानी का प्राकृतिक स्रोत उपलब्ध हुआ है. इससे नदी के आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है.
सिरसा नदी के किनारे बनाए गए घाटों ने इसके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को भी बढ़ाया है. ग्रामीणों को धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध हुआ है. लंबे समय से उपेक्षित नदी के किनारे अब गतिविधियां बढ़ने लगी हैं.
इस प्रकार परियोजना को केवल नदी की खुदाई या जल प्रवाह बहाल करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि नदी के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्तरों पर काम किया गया।
कलेक्ट्रेट में अधिकारियों और कर्मचारियों का सम्मान
राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिलने के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की ओर से कलेक्ट्रेट सभागार में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इसमें सिरसा नदी पुनरुद्धार परियोजना को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया.
जिले के विभिन्न खंड विकास अधिकारियों, तकनीकी टीमों, पंचायत सचिवों तथा परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.
इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि जिले के अधिकारियों, कर्मचारियों, ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है.
*पुरस्कार को मुख्य विकास अधिकारी शत्रोहन वैश्य ने जिलाधिकारी और परियोजना से जुड़े उपायुक्त श्रम रोज़गार तूलिका श्रीवास्तव सहित सभी लोगों को समर्पित किया*
कहा कि सिरसा नदी का पुनरुद्धार सामूहिक प्रयास से संभव हुआ है. समय-समय पर जिले में तैनात रहे जिलाधिकारियों के मार्गदर्शन में अभियान को आगे बढ़ाया गया.
उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों, कर्मचारियों, ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और आम नागरिकों ने किसी भी स्तर पर अभियान में सहयोग किया, यह सम्मान उन सभी की उपलब्धि है।
सिरसा नदी का यह कायाकल्प इस बात का उदाहरण है कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी को जोड़कर किसी प्राकृतिक जलस्रोत को फिर से जीवंत किया जा सकता है. कभी जिन स्थानों पर मिट्टी और गाद के कारण नदी का प्रवाह रुक गया था, वहां अब पानी की धारा दिखाई दे रही है।
108 किलोमीटर लंबी इस नदी के पुनरुद्धार से 49 गांवों और छह विकासखंडों में रहने वाली आबादी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है.जल संरक्षण, भूजल स्तर, कृषि, ग्रामीण रोजगार, पशु-पक्षियों और स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव को प्रशासन महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है.
राष्ट्रीय स्तर पर मिले स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड ने सिरसा नदी पुनरुद्धार अभियान को एक नई पहचान दी है. जिले के लिए यह सम्मान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक समय मृतप्राय हो चुकी नदी को फिर से प्रवाह देने के लिए प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर लंबा अभियान चलाया और उसे राष्ट्रीय स्तर तक पहचान मिल।
