जौनपुर प्रशासनिक सेवा की कार्यशाला, यहां सीखने को मिली समस्याओं के समाधान की संवेदनशीलता : पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र

बृज बिहारी दुबे
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 *रिपोर्टर दीपक शुक्ला* 

 *मेरठ।* 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी धरती मेरठ में आयोजित सिविल सर्वेंट स्पोर्ट्स मीट में पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र ने अधिकारियों और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने मेरठ की क्रांतिकारी धरती को नमन करते हुए कहा कि यह वह भूमि है, जिसने देशवासियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उन्होंने बलिया और मेरठ की क्रांतिकारी परंपरा को भी स्मरण करते हुए वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि मेरठ में उन्हें कई वर्षों तक उपजिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। यहां आने पर पुरानी स्मृतियां फिर जीवंत हो उठीं और यह अनुभव हुआ कि क्रांतिकारी धरती व्यक्ति को निरंतर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है।
सिविल सर्वेंट स्पोर्ट्स मीट में उन्होंने अपने पूर्व सहयोगी एवं अधिकारी सुनील भारती से मुलाकात की। सुनील भारती पूर्व में जौनपुर में उनके अधीन उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में मऊ में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि सुनील भारती अच्छे एथलीट और धावक हैं। इसके अलावा रिजनल स्पोर्ट्स ऑफिसर जितेंद्र यादव सहित विभिन्न जनपदों से आए अधिकारियों और खिलाड़ियों से भी उनकी मुलाकात हुई।
उन्होंने कहा कि जौनपुर में उनके अधीन कार्य कर चुके सुनील भारती, आबकारी अधिकारी निरीक्षक सुनेत्रा सिंह सहित अनेक अधिकारियों की खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी देखकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हुई। बिजनौर के प्रतिभागियों की मौजूदगी ने भी उन्हें अपनी मातृभूमि की याद दिलाई।
खेल जीवन को गतिशील और प्रशासनिक कार्यों को बेहतर बनाते हैं
पूर्व आईएएस ने कहा कि खेल केवल पदक हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को जीवंत और गतिशील बनाए रखने की प्रक्रिया है। अधिकारियों को भी खेल गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। इससे शारीरिक और मानसिक ऊर्जा बनी रहती है तथा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन अधिक उत्कृष्ट ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा—“खेलो और आगे बढ़ो।” खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं के लिए सेवाओं में आगे बढ़ने और प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाने के अनेक अवसर हैं।
सीएम युवा अभियान से जौनपुर में युवाओं को रोकने का प्रयास
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री के उस विजन के अनुरूप कार्य किया गया, जिसमें युवाओं को रोजगार और विकास के अवसर देकर उनके जनपद से पलायन को रोकना है। ‘सीएम युवा अभियान’ के अंतर्गत जौनपुर को प्रथम स्थान तक पहुंचाने का प्रयास इसी दिशा में किया गया।
उन्होंने कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में बुजुर्गों के सम्मान और उनके कल्याण की भावना निहित है। इसी सोच के तहत पेंशन योजनाओं में अधिक से अधिक पात्र लोगों को आच्छादित करने का प्रयास किया गया।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनसहयोग और बदलापुर विधायक रमेश मिश्रा सहित सभी संबंधित लोगों के समन्वय से पीली नदी के उद्धार का कार्य आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि यह विकास की एक दिशा और दशा है तथा भविष्य में भी जनहित के कार्यों के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेगा।
“जौनपुर को प्रशासनिक सेवा की कार्यशाला के रूप में देखता हूं”
पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र ने जौनपुर के अपने कार्यकाल को विशेष रूप से याद करते हुए कहा कि जौनपुर ने उनके व्यक्तित्व और प्रशासनिक सोच में नई दृष्टि विकसित की। उन्होंने स्वीकार किया कि जौनपुर में कार्य करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि प्रशासनिक सेवा में अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।
उन्होंने कहा कि राजस्व विवादों और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जिस संवेदनशीलता और व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, उसे जौनपुर में कार्य करते हुए उन्होंने विशेष रूप से सीखा। न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किसानों की समस्याओं के समाधान की पद्धति को समझने का अवसर भी उन्हें जौनपुर में मिला।
उन्होंने कहा, “मैं जनपद जौनपुर को प्रशासनिक सेवा की कार्यशाला के रूप में देखता हूं। अच्छे अधिकारियों और प्रशिक्षु अधिकारियों को जौनपुर में कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे राजस्व विवादों और आमजन की समस्याओं के समाधान के प्रति संवेदनशील होकर कार्य करना सीख सकें।”
सेवानिवृत्ति के बाद भी जनहित में कार्य करने का संकल्प
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास कार्य करने के अनेक अवसर हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता जनहित है। उन्होंने कहा कि अपनी योग्यता और अनुभव के माध्यम से समाज और आमजन के लिए जो भी उपयोगी कार्य कर सकेंगे, उसे करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने अपने सेवाकाल से जुड़े जनपदों—बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बदायूं, गाजियाबाद, गोरखपुर, प्रयागराज सहित अन्य स्थानों को स्मरण करते हुए वहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से जौनपुर को अपने व्यक्तित्व में नई सीख और सुधार की दिशा देने वाला जनपद बताया।

“हम होंगे कामयाब, शीघ्र ही

उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें कार्य करने का अवसर और प्रेरणा प्रदान करने के लिए वह हृदय से आभारी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों से सफलता अवश्य मिलेगी और दोहराया—“हम होंगे कामयाब, शीघ्र ही।”
अपने संबोधन में उन्होंने जीवन को गतिशील बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति को यात्रा करते रहना चाहिए, किताबें पढ़नी चाहिए, अपने मन की अंतर्ध्वनि सुननी चाहिए, दूसरों की प्रशंसा करनी चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वयं की मदद करने के साथ दूसरों की मदद भी करनी चाहिए। उनका कहना था कि निरंतर सीखना और स्वयं को गतिशील रखना ही जीवन की सार्थकता है।
अंत में उन्होंने जौनपुर की जनता के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की और अपनी मातृभूमि बिजनौर को नमन किया। उन्होंने बहराइच, जौनपुर, सारंगढ़, कानपुर देहात, गाजियाबाद सहित अपने सेवाकाल से जुड़े विभिन्न जनपदों के लोगों के प्रति भी आभार जताया।
उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और स्नेह की स्मृतियां उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संबोधन का समापन उन्होंने “जय हिंद, जय भारत, वंदे मातरम्” के उद्घोष के साथ किया।

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