रिपोर्ट भोला ठाकुर
दिल्ली जय विज्ञान,जय संविधान के दृष्टिकोण को भारत के अधिकार वंचित/अति पिछड़ा (EBC/MBC) वर्ग को ध्यान से पढ़कर समझकर, मनन एवं अध्ययन करके निर्णय करने की आवश्कता है।
भारत के संविधान के अनुसार भारत की जाति प्रथा समाप्त है,जो सोचोगें,वही करोगें,जो करोगे,वही बनोगे, इस लिए आराम ही हराम है,निकलो घर,मकानो से,जंग लड़ो बेईमानों से यह मार्ग उन्नति का निर्माण कर सकता है।
भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन संघर्ष एवं विचारों को भारत में स्थापित करने के उद्देश्य से देश में लोकतंत्र की क्या पहचान, सबका हिस्सा,इज्जत एक समान यही मुद्दा ,सशक्त एवं उन्नतशील राष्ट्र के निर्माण के लिए सार्थक है इसी कारण भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर आरक्षण मॉडल फार्मूले की तर्ज पर लागू किए जाने की पुरजोर उठ रही देश एवं प्रदेश में मांग, लेकिन जिसे लागू नहीं किया जा रहा है। इसी को आधार मानते हुए लागू कराने की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी संगठन शक्ति को मजबूत करना होगा।
भारत में भारतीय संविधान के अनुसार अधिकार वंचित (EBC/MBC) वर्ग अंतिम पायदान पर पड़े भारत के नागरिकों को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रावधान है, इसलिए सामाजिक शैक्षणिक एवं आर्थिक राजनीतिक क्षेत्र में भागीदारी/ प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत के नागरिकों की संविधान रूपी लैब में जांच कराई गई जांच के उपरांत भारत में तथाकथित सामाजिक व्यवस्था के कारण जो समस्या,बीमारी थी वह उजागर हुई उनकी संख्या हजारों हजार उप जातियों में अलग-अलग बटी हुई थी जो प्रकाश में आई उसको जोड़ कर चार वर्गों में समायोजित किया गया और समस्या के निदान के लिए उसको नाम दिया गया जो क्रमवार प्रेषित है।
1-अनुसूचित जाति (S C वर्ग 15%)
2-अनुसूचित जनजाति(ST वर्ग 7,5%)
3-पिछड़ी जति(BC वर्ग 12%)
4-अति पिछड़ी जाति
(EBC/MBC वर्ग 40%)
साधन एवं नेतृत्व विहीन समाज अति पिछड़ा (EBC/MBC) 40% वर्ग में लगभग दो दशकों से अपने संवैधानिक अधिकारों की भूख के करण जागरूक एवं ऐकता का वातावरण बना है, इसके कारण देश एवं प्रदेशों में कोई भी राजनीतिक दल अपने बल पर सरकार बनाने की हैसियत में नजर नहीं आ रहा है एसी स्थिति में सत्ताधारियों को समझने की आवश्यकता है।
अब समझाने की दिशा में बढ़ते कदम" 1952 से आज तक केंद्र एवं राज्य की सरकारों के सामने उत्तर प्रदेश के अति पिछड़ा (EBC/MBC) 40%वर्ग का सवाल
भारत की सरकारों एवं उत्तर प्रदेश की सरकारों के द्वारा उक्त समस्या के निदान के लिए समय-समय पर आयोगों का गठन किया गया तमाम भाषण वायदों के साथ अधिकार वंचित अंतिम पायदान पर पड़े हुए अति पिछड़ा (EBC/MBC) 40% वर्ग को गुमराह करके सरकार बनाते रहे और धोखा देकर सरकार चलाते रहे लेकिन भागीदारी/ प्रतिनिधित्व देने का काम नहीं किया।
जब कि अनुसूचित जाति SC वर्ग तथा अनुसूचित जनजाति ST वर्ग को उनकी आबादी के अनुसार संवैधानिक आधार से उनकी बीमारी,समस्या के निदान की दवाई आरक्षण के रूप में भागीदारी/प्रतिनिधित्व 1952 से ही मिलना शुरू हो गया।
यहां देखें केंद्र की सरकारों के द्वारा 1953 से आयोग बनाते रहे रिपोर्ट भी आती रही लेकिन भागीदारी/ प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके लागू नहीं किया गया है।
यही हाल उत्तर प्रदेश की सरकारों के द्वारा 1975 से आयोग बनाते रहे रिपोर्ट भी आती रही लेकिन भागीदारी/प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके लागू नहीं किया गया है।
जब कि अति पिछड़ा बड़ी संख्या वाला (EBC/MBC) 40% वर्ग के सामाजिक संगठन तथा छोटी-छोटी राजनीतिक पार्टियां एवं सामाजिक अधिकार के तहत न्याय में विश्वास रखने वाले अन्य राजनीतिक दल भी एक स्वर में वर्तमान की केंद्र की सरकार द्वारा गठित जी रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को लागू करने एवं उत्तर प्रदेश की सरकार के द्वारा गठित राघवेंद्र प्रसाद सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू कराए जाने के लिए तहसील,जिला,मंडल,प्रदेश एवं केंद्र स्तर पर आंदोलन करके निरंतर मांग की जा रही है लेकिन सरकारों द्वारा लागू नहीं किया जा रहा है।
इसी क्रम में अति पिछड़ा(EBC/MBC) 40% वर्ग देश एवं प्रदेश स्तर पर लोकसभा क्षेत्र, विधानसभा चुनावी क्षेत्रों में वर्गीकरण के आधार से आरक्षण सुनिश्चित करके भागीदारी/प्रतिनिधित्व देने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई जा रही है।
इसी क्रम में अति पिछड़ा (EBC/MBC) 40% वर्ग त्रिस्तरीय पंचायतों शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिहार प्रदेश में लागू आरक्षण की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में वर्गीकरण के आधार से आरक्षण सुनिश्चित करके लागू कराये जाने के लिए तहसील,जिला,मंडल,प्रदेश स्तर पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से मांग निरंतर उठाई जा रही है। उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा उक्त आरक्षण को लागू न किए जाने पर उक्त वर्ग में भारी आक्रोश की भावना पनप रही है।
क्या अब 40%(EBC/MBC) अति पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकार, भागीदारी/प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके लागू किए जाने के बगैर कोई भी राजनीतिक दल अपने बल पर सरकार बना सकता है।?
आशुतोष राणा की पंक्तियों के साथ,दरिया अब तेरी खैर नहीं,बूंदों ने बगावत कर दी है! नादान न समझ बुजदिल इनको, लहरों ने बगावत कर दी है!! हम परवाने हैं मौत समां,मरने का किसको खौफ यहां। रे तलवार तुझे झुकना होगा,गर्दन ने बगावत कर दी है!!
संगठन में ही शक्ति है।
गहन अध्ययन एवं संकलन
