केंद्रीय बजट 2026: एमएसएमई सेक्टर की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा बजट अमित उपाध्याय, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), गौतम बुद्ध नगर

बृज बिहारी दुबे
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रिपोर्ट - भोला ठाकुर 



गौतम बुद्ध नगर आज वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट से देश के एमएसएमई सेक्टर को बड़ी उम्मीदें थीं। एमएसएमई सेक्टर, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माना जाता है, देश में 7.5 करोड़ से अधिक इकाइयों के माध्यम से न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करता है, बल्कि जीडीपी और निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

वर्तमान समय में एमएसएमई उद्योग महंगे ऋण, बढ़ती उत्पादन लागत, जटिल अनुपालन प्रक्रियाओं, वर्किंग कैपिटल की कमी तथा स्किल्ड मैनपावर की भारी कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इस बजट से उद्योग को एक विशेष और व्यापक राहत पैकेज की उम्मीद थी, जो दुर्भाग्यवश पूरी तरह से सामने नहीं आया।

एमएसएमई सेक्टर को अपेक्षा थी कि वर्षों से किराये पर संचालित उद्योगों के लिए औद्योगिक लैंड बैंक की स्थापना की जाएगी, एमएसएमई पार्क एवं क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, अनावश्यक निरीक्षणों से राहत मिलेगी तथा अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। इसके साथ-साथ नई मशीनरी, ऑटोमेशन और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए विशेष सब्सिडी, छोटे उद्योगों के लिए बिजली दरों में रियायत तथा जीएसटी रिफंड की त्वरित और आसान व्यवस्था की घोषणा होनी चाहिए थी, जिससे वर्किंग कैपिटल और कैश फ्लो की समस्या का समाधान हो सके।

एमएसएमई इंडस्ट्री की सबसे बड़ी आवश्यकता सस्ते और बिना गारंटी के ऋण की है। बजट में मशीनरी और कार्यशील पूंजी के लिए आसान प्रक्रिया से कम ब्याज दर पर बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने हेतु ठोस और प्रभावी योजना की आवश्यकता थी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं आधुनिक तकनीक को अपनाकर एमएसएमई उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए डिजिटल स्केल-बिल्डिंग, एआई और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर केंद्रित विशेष पैकेज की अपेक्षा थी। साथ ही उद्योगों में बढ़ती स्किल्ड मैनपावर की कमी को देखते हुए अधिक संख्या में कौशल विकास केंद्रों की स्थापना के लिए ठोस राहत पैकेज की आवश्यकता थी।

हालांकि बजट में सेमीकंडक्टर 2.0, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) को बढ़ावा देने, 200 नए औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने, चैंपियन एमएसएमई योजना के अंतर्गत 10,000 करोड़ रुपये के प्रावधान तथा लेन-देन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की घोषणा जैसे कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, परंतु ये उपाय एमएसएमई सेक्टर की जमीनी और दैनिक समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

कुल मिलाकर, यह कहना गलत नहीं होगा कि कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार प्रदान करने वाला, जीडीपी और निर्यात में अहम योगदान देने वाला एमएसएमई सेक्टर इस बजट में एक बार फिर अपेक्षाकृत उपेक्षित रहा है, जबकि इस सेक्टर को बजट से बहुत अधिक उम्मीदें थीं।

एमएसएमई उद्योगों के लिए एक समग्र और विशेष राहत पैकेज की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिले, निवेश और उत्पादन में वृद्धि हो तथा सबसे महत्वपूर्ण—देश में रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा हों।

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