जौनपुर में आजाद बिंद हत्याकांड को लेकर बहन सौम्या बिंद ने डीएम और एसपी कार्यालय के चक्कर लगाए। गैंगस्टर व रासुका लगाने, फरार आरोपियों पर कार्रवाई और तरसावां मोड़ पर पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग उठाई।
जौनपुर। भाई की हत्या के बाद न्याय की उम्मीद में पिछले करीब पांच से छह महीने से लगातार संघर्ष कर रहीं सौम्या बिंद एक बार फिर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अपने भाई आजाद बिंद की हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई, गैंगस्टर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा क्षेत्र में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की।
सौम्या बिंद के मुताबिक, 21 मई को उनके भाई की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह दूल्हा बनकर शादी करने जा रहे थे। इस घटना के बाद से ही वह अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए लगातार अधिकारियों के कार्यालयों, थाने और न्यायालय के चक्कर लगा रही हैं।
समय से कार्रवाई नहीं हुई तो क्या फायदा: सौम्या
बातचीत के दौरान सौम्या बिंद ने कहा कि जिले में पुलिस अधीक्षक का तबादला होने और नए अधिकारी के आने की जानकारी मिलने के बाद वह अपनी शिकायत लेकर दोबारा अधिकारियों के पास पहुंचीं। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर और रासुका जैसी कार्रवाई समय से होनी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिल सके और अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़े।
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि गैंगस्टर की कार्रवाई के तहत आरोपियों की कथित अवैध संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी हो सकती है। हालांकि, सौम्या का कहना है कि उनके परिवार की प्राथमिकता संपत्ति जब्त कराने से ज्यादा न्याय और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कराना है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि आरोपी जमानत पर बाहर आते हैं तो उनके परिवार और मामले में गवाही देने वाले लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की।
दो आरोपियों के बाहर होने का दावा
सौम्या बिंद ने बातचीत में दावा किया कि अशोक यादव और अविनाश चौहान फिलहाल बाहर हैं, जबकि अन्य आरोपी जेल में हैं। उन्होंने दोनों आरोपियों के बाहर होने पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका और आरोपियों को राहत मिलने के कारणों की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी, जमानत और अन्य कानूनी स्थितियों की आधिकारिक जानकारी संबंधित पुलिस एवं न्यायालय के रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
तरसावां मोड़ पर पुलिस चौकी बनाने की मांग
सौम्या बिंद ने क्षेत्र की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए तरसावां मोड़ पर पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की। उनका कहना है कि आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को पुलिस संबंधी शिकायतों के लिए सरायख्वाजा थाने जाना पड़ता है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
उन्होंने बताया कि चौकी स्थापित करने के लिए पहले भी मांग की जा चुकी है, लेकिन उनके अनुसार अभी तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सौम्या का मानना है कि यहां पुलिस चौकी बनने से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
नेताओं के सहयोग पर भी उठाए सवाल
सौम्या बिंद ने कहा कि भाई की हत्या के बाद कई राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनके परिवार को न्याय दिलाने में मदद करने का आश्वासन दिया था। लेकिन उनके अनुसार, शुरुआती दौर में साथ देने के बाद अब बहुत कम लोग उनके संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर तस्वीरें खिंचवाना या सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पर्याप्त नहीं है। नेताओं को अधिकारियों के सामने पीड़ित परिवार की आवाज उठानी चाहिए और न्याय मिलने तक साथ खड़ा रहना चाहिए।
उन्होंने वीआईपी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से मिले सहयोग का उल्लेख किया, लेकिन कहा कि किसी बड़े राजनीतिक चेहरे की ओर से लगातार सक्रिय समर्थन नहीं दिखाई दिया। साथ ही उन्होंने अन्य दलों से भी मदद की अपेक्षा जताई।
पढ़ाई के साथ न्याय की लड़ाई
सौम्या ने बताया कि भाई की हत्या के बाद से उनका अधिकांश समय न्याय की लड़ाई में ही बीत रहा है। कभी न्यायालय तो कभी डीएम और एसपी कार्यालय जाना पड़ता है। आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके समाज के गरीब और कमजोर परिवारों को भी न्याय मिले। उनके मुताबिक, कई परिवार हत्या जैसी गंभीर घटनाओं के बाद शुरुआती विरोध और चर्चा के बावजूद धीरे-धीरे अकेले पड़ जाते हैं। ऐसे में पीड़ित परिवारों के साथ लगातार खड़े रहने की जरूरत है।
सौम्या ने यह भी कहा कि उनका संघर्ष सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए है जो न्याय पाने के लिए वर्षों तक भटकते रहते हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट में धरने की चेतावनी
सौम्या बिंद ने स्पष्ट कहा कि यदि उनके भाई की हत्या के मामले में समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तथा तरसावां मोड़ पर पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वह कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगी।
उन्होंने शासन और प्रशासन से अपील की कि गरीब और पीड़ित परिवारों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अब सवाल यह है कि आजाद बिंद हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और क्षेत्र में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग पर प्रशासन कब तक निर्णय लेता है। पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा दिलाने के लिए प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
