रिपोर्टर दीपक शुक्ला
नगीना/बिजनौर, 8 सितंबर 2026। वर्ष 1984 में हिंदू इंटर कॉलेज, नगीना से इंटरमीडिएट की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने मंगलवार को अपने तत्कालीन गुरुजनों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। दशकों बाद अपने गुरुओं के सानिध्य में पहुंचे डॉ. दिनेश चंद्र भावुक नजर आए। उन्होंने गुरुजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और चरण स्पर्श कर जीवन की आगामी यात्रा के लिए आशीर्वाद लिया।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि हमारे शास्त्रों में गुरु की महिमा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है— “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।” उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि शिष्य के व्यक्तित्व और जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।
उन्होंने विशेष रूप से अपने रसायन विज्ञान के तत्कालीन गुरु श्री यशपाल सिंह जी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कक्षा 11 और 12 में उन्हें रसायन विज्ञान की शिक्षा दी। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा का ही परिणाम रहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा में रसायन विज्ञान विषय में उन्होंने 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। आगे चलकर उन्हीं संस्कारों और प्रेरणा से उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी करने तथा ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में एमएससी फाइनल में स्वर्ण पदक प्राप्त करने का अवसर मिला।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि आगे की शैक्षिक यात्रा में डॉ. डी. कुमार, डॉ. ए.के. सेन, प्रोफेसर जगदंबा सिंह, जे.पी. शर्मा और प्रोफेसर एच.पी. तिवारी सहित अनेक विद्वान गुरुजनों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि गुरुजनों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से उन्होंने रसायन विज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात किया और उस समय सीएसआईआर-नेट में जेआरएफ एवं एसआरएफ के माध्यम से पांच बार सफलता प्राप्त करने का अवसर मिला।प्रोफेसर जगदंबा सिंह, जिनके सानिध्य में और जिनके अधीनस्थ रहकर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की, उनका विशेष-विशेष योगदान मेरे जीवन को समुत्कर्ष पर पहुँचाने में रहा, हृदय से आभार।
इस अवसर पर उन्होंने हिंदू इंटर कॉलेज, नगीना के तत्कालीन प्रधानाचार्य श्री राजेंद्र अग्रवाल जी के प्रति भी हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि श्री अग्रवाल की अनुशासनप्रियता, कर्तव्यनिष्ठा और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के प्रति समर्पण ने विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण प्रदान किया। उनके प्रधानाचार्य रहते ही उन्हें कक्षा 11 और 12 की शिक्षा प्राप्त करने तथा इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट सफलता हासिल करने का अवसर मिला।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि हिंदू इंटर कॉलेज, नगीना के उनके गुरुजनों ने उन्हें केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि एक सुयोग्य नागरिक बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हीं संस्कारों और शिक्षा के आधार पर उन्हें आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जिसे उस समय ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ कहा जाता था, में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
उन्होंने बॉटनी के तत्कालीन अध्यापक श्री अनिल गुप्ता जी को भी स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यद्यपि उनका बॉटनी विषय से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा, लेकिन श्री गुप्ता एक प्रखर और समर्पित अध्यापक थे तथा उनका व्यक्तित्व विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद अपने तत्कालीन गुरुजनों से मिलना उनके लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण रहा। उन्होंने सभी गुरुजनों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान, माता-पिता का सम्मान और संतों का सम्मान सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। हमें अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों और संस्कृति का परिचायक है।
अंत में पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सभी के सुखी, स्वस्थ और निरोगी जीवन की कामना करते हुए कहा कि किसी के जीवन में कष्ट न हो और हम गुरुजनों, माता-पिता तथा संतों का सम्मान करते हुए राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करते रहें। जय हिंद।
