राकेश सिंह पुंडीर के परिवार से वर्ष 2005 से जुड़े हैं आत्मीय संबंध, बच्चों से संवाद कर शिक्षा और राष्ट्रहित के प्रति किया प्रेरित*

बृज बिहारी दुबे
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 *रिपोर्टर दीपक शुक्ला* 


सहारनपुर, 7 सितंबर 2026।
“ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥”
इसी आध्यात्मिक एवं आत्मीय भाव के साथ पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र ने सोमवार को जनपद सहारनपुर के ग्राम पीकी पहुंचकर वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों को एक बार फिर नई ऊष्मा और ऊर्जा प्रदान की। सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ अपने पुराने संबंधों और स्मृतियों को वर्तमान से जोड़ने के उद्देश्य से उन्होंने राकेश सिंह पुंडीर एवं उनके परिवारजनों से मुलाकात की।
डॉ. दिनेश चन्द्र ने बताया कि राकेश सिंह पुंडीर एवं उनके परिवार से उनका संबंध वर्ष 2005 से निरंतर बना हुआ है। परिवार ने विभिन्न परिस्थितियों में सदैव सुख-दुख में उनका साथ दिया है। लंबे अंतराल के बाद परिवार के बीच पहुंचने पर उन्होंने आत्मीय प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि पुराने संबंध समय के साथ कमजोर नहीं होते, बल्कि आत्मीय संवाद और आपसी सहभागिता से उनमें नई ऊर्जा का संचार होता है।
इस अवसर पर उन्होंने परिवार के बच्चों से भी मुलाकात की। बच्चों ने शिक्षा, भविष्य, राष्ट्रभक्ति और जीवन को सार्थक बनाने जैसे विभिन्न विषयों पर उनसे संवाद किया। डॉ. दिनेश चन्द्र ने बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने उनसे आशीर्वाद लिया, वहीं डॉ. दिनेश चन्द्र ने परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान श्री नंदकिशोर शर्मा द्वारा परिवार की ओर से डॉ. दिनेश चन्द्र को अंगवस्त्र एवं पुष्प भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान श्री हरिओम सिंह राणा, राकेश सिंह पुंडीर, उनके परिजन, पलक सहित कई बच्चे उपस्थित रहे। सभी से आत्मीय मुलाकात कर डॉ. दिनेश चन्द्र ने परिवार के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
नवजात शिशु के आगमन पर परिवार को दी शुभकामनाएं
मुलाकात के दौरान परिवार में नवजात शिशु के जन्म का सुखद अवसर भी सामने आया। डॉ. दिनेश चन्द्र ने नवजात शिशु को आशीर्वाद देते हुए उसकी माताजी एवं पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि परिवार में नवजात का आगमन अपने आप में अत्यंत मंगलमय और आनंददायक क्षण होता है। इस सुखद अवसर पर परिवार के साथ कुछ समय बिताकर उन्हें भी आत्मीय खुशी और नई ऊर्जा का अनुभव हुआ।
डॉ. दिनेश चन्द्र ने कहा कि जीवन में संबंधों की अपनी विशिष्ट भूमिका होती है। संबंध केवल रक्त के आधार पर नहीं बनते, बल्कि विश्वास, आत्मीयता, सहयोग, संवेदना और निरंतर संवाद से भी संबंधों का निर्माण होता है। समय-समय पर एक-दूसरे से मिलना, बातचीत करना तथा सुख-दुख में सहभागी बनना संबंधों को और अधिक मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि “संबंध रक्त से अलग होते हैं, लेकिन उनका आधार आत्मीयता और विश्वास होता है।” यही आत्मीयता जीवन को ऊर्जा प्रदान करती है और व्यक्ति को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यात्रा, पुस्तकों और संवाद को बताया जीवन की ऊर्जा
डॉ. दिनेश चन्द्र ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में निरंतर गतिशील रहना चाहिए। यात्रा व्यक्ति के अनुभवों का विस्तार करती है, पुस्तकें उसके विचारों को समृद्ध करती हैं और अलग-अलग लोगों से मिलना जीवन में नई दृष्टि एवं ऊर्जा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने मन की अंतर्ध्वनि को सुनना बंद कर दे, नई जगहों पर जाना छोड़ दे, पुस्तकें पढ़ना छोड़ दे और दूसरों की प्रशंसा एवं उत्साहवर्धन करना छोड़ दे, तो जीवन की जीवंतता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए जीवन में यात्राओं, अध्ययन, संवाद, सकारात्मक सोच और मानवीय संबंधों को निरंतर स्थान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रंग-बिरंगे अनुभवों से भरा जीवन ही वास्तविक अर्थों में जीवंत जीवन है। लोगों से मिलना, उनके अनुभवों को सुनना और उनके सुख-दुख में सहभागी बनना समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
ईश्वर से सामाजिक सेवा की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना
इस अवसर पर पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र ने भगवान श्रीराम के चरणों में नमन करते हुए भगवान भोलेनाथ एवं हनुमान जी से प्रार्थना की कि उन्हें इसी प्रकार ऊर्जावान, जीवंत और सक्रिय रहकर समाजहित एवं राष्ट्रहित में कार्य करने की शक्ति प्रदान करें।
उन्होंने मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां वैष्णो देवी, मां शाकुंभरी देवी सहित माता के विभिन्न स्वरूपों से भी प्रार्थना की कि सभी को राष्ट्रहित, समाजहित और मानव कल्याण के लिए आगे बढ़कर कार्य करने की प्रेरणा मिले।
उन्होंने उपस्थित परिवारजनों और बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज की मजबूती आपसी संबंधों, संस्कारों और सकारात्मक संवाद से होती है। नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार, संवेदना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी अपनाना चाहिए।
अंत में डॉ. दिनेश चन्द्र ने सभी परिवारजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके सुख, समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना की।
जय हिन्द!

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