रामपुर, जौनपुर। थाना रामपुर क्षेत्र के कोदैला गांव में विवादित जमीन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। तहसीलदार मड़ियाहूं रविरंजन कश्यप, नायब तहसीलदार कृति, तहसील कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर एक आशियाने में आग लगाए जाने का दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस और तहसील प्रशासन की मौजूदगी में उनके रहायशी मड़हे में आग लगाकर दूसरे पक्ष को जबरन कब्जा दिलाया गया। परिवार ने सवाल उठाया है कि आखिर किस आदेश के आधार पर उनके आशियाने को हटाकर दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाया गया।
पिता और दो बेटियों को थाने में बैठाने का आरोप
परिवार के अनुसार, कार्रवाई के दौरान रामधारी प्रजापति और उनकी दो बेटियों अंजू प्रजापति और मंजू प्रजापति को रामपुर थाने ले जाया गया। आरोप है कि पिता रामधारी प्रजापति का चालान कर दिया गया, जबकि दोनों बेटियों को रातभर थाने में बैठाए रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया।
मंजू प्रजापति ने आरोप लगाया कि उनकी मां सावित्री ने अरुण सिंह और संजय सिंह से करीब पौने तीन बीघा जमीन खरीदी थी। उनका दावा है कि बैनामे में उनके घर के सामने की चौहद्दी दर्ज थी और परिवार लंबे समय से उक्त जमीन पर कब्जे में था।
फर्जी अंगूठा लगाकर आदेश कराने का आरोप
मंजू प्रजापति का आरोप है कि विपक्षी पक्ष के डॉ. बड़े लाल ने उसी नंबर की जमीन खरीदते समय पहले से दर्ज चौहद्दी का उल्लेख कर जमीन खरीद ली। परिवार का दावा है कि बाद में उनकी मां के नाम से कथित रूप से फर्जी अंगूठा लगाकर धारा 116 के मुकदमे में आदेश कराया गया।
मंजू के अनुसार, इसकी जानकारी होने पर उन्होंने कथित फर्जी अंगूठे के मामले को लेकर दीवानी न्यायालय में मुकदमा दायर किया। उनका यह भी दावा है कि जमीन से संबंधित मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।
पैसा देकर कब्जा हटवाने का आरोप
पीड़ित परिवार ने तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियों और रामपुर थानाध्यक्ष रमेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि विपक्षी पक्ष ने कथित रूप से पैसे देकर उनका कब्जा हटवाया और उन्हें थाने में बैठाकर रातोंरात पक्का निर्माण कराकर दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया।
परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की है कि विवादित जमीन पर कार्रवाई और आशियाना हटाने या आग लगाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था।
फिलहाल वायरल वीडियो और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आर न्यूज यूपी वायरल वीडियो की सत्यता और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। मामले में राजस्व विभाग, पुलिस तथा विपक्षी पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
