जौनपुर। बदलापुर विकासखंड के ग्राम उदपुर गेल्हावा में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय आवंटन को लेकर एक मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त अभिलेखों के आधार पर गांव की निवासी नम्रता सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, ग्राम विकास अधिकारी दुर्गेश तिवारी द्वारा आरटीआई के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी में वर्ष 2021 से 2026 के मध्य राजनाथ सिंह पुत्र रामखेलावन सिंह के नाम पर व्यक्तिगत शौचालय आवंटित होना दर्ज है। वहीं शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्र के अनुसार राजनाथ सिंह का निधन 6 मई 2020 को हो चुका था।
आरटीआई से प्राप्त अभिलेखों और मृत्यु प्रमाण पत्र के तथ्यों के आधार पर यह प्रश्न उठ रहा है कि जब संबंधित व्यक्ति का निधन वर्ष 2020 में हो चुका था, तो वर्ष 2021-2026 के दौरान उनके नाम पर शौचालय का आवंटन किस आधार पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है।
नम्रता सिंह का आरोप है कि जिस शौचालय को सरकारी अभिलेखों में राजनाथ सिंह के नाम दर्शाया गया है, वह वास्तव में उनके परिवार के कब्जे और उपयोग में है तथा उनकी निजी संपत्ति का हिस्सा है। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार किए गए अभिलेखों तथा लाभार्थी चयन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
मामले में एक वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ऑडियो में कथित रूप से यह दावा किया जा रहा है कि शौचालय योजना से संबंधित धनराशि राजनाथ सिंह के पुत्र अविनाश सिंह के बैंक खाते में प्राप्त हुई थी। हालांकि इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरटीआई में उपलब्ध कराई गई जानकारी सही है, तो यह मामला सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटि, लाभार्थी सत्यापन में लापरवाही अथवा अन्य प्रशासनिक अनियमितता से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, संबंधित अभिलेखों की सत्यता की पड़ताल करने तथा तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
