पद नहीं, संवेदना बोली ठंड में 250 जरूरतमंदों के लिए संदीप सिंह बने उम्मीद की गर्माहट

बृज बिहारी दुबे
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 रिपोर्ट कमलेश मिश्रा 

बरसठी (जौनपुर)।* जब सर्दी अपने चरम पर हो और गरीबों के पास ठंड से बचने का साधन न हो, तब यदि कोई आगे बढ़कर सहारा बने तो वह कार्य केवल मदद नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव बन जाता है। बरसठी विकास खंड के बबुरीगांव (बेलौना कला) में रविवार को कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां पूर्व ग्राम प्रधान संदीप सिंह ने बिना किसी पद या औपचारिक जिम्मेदारी के 250 जरूरतमंदों को कंबल वितरित कर ठंड से राहत पहुंचाई।

कंबल पाकर बुजुर्गों, महिलाओं और असहायों की आंखों में दिखी संतुष्टि इस बात की गवाह बनी कि समाजसेवा पद की मोहताज नहीं होती। ग्रामीणों ने कहा कि संदीप सिंह आज भले ही प्रधान न हों, लेकिन वे आज भी गांव की हर समस्या को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। गरीबों की पीड़ा हो या असहायों की मजबूरी—संदीप सिंह हमेशा सबसे पहले खड़े दिखाई देते हैं।

ग्रामीणों ने इस कार्य को सराहनीय, प्रेरणादायक और अनुकरणीय बताते हुए कहा कि ऐसे समाजसेवी और सक्षम लोगों को आगे आकर ठंड के इस मौसम में जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए, ताकि कोई भी असहाय व्यक्ति ठंड के कारण अपनी जान न गंवाए।

कार्यक्रम में डॉ. राजेश चौहान बतौर अतिथि उपस्थित रहे। इस दौरान ग्राम प्रधान अरुण कुमार सिंह (बरसठी) सहित गांव के कई सम्मानित लोग मौजूद रहे, जिनमें कंश राज यादव (एडवोकेट), संतराज यादव, अरविंद यादव, कृष्ण जी दुबे, आशा राम तिवारी, लाल जी यादव और हरिश्चंद गौतम प्रमुख रूप से शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने कहा कि आज समाज को ऐसे ही संवेदनशील, जागरूक और सेवा भाव से जुड़े लोगों की जरूरत है। संदीप सिंह द्वारा किया गया यह कार्य न केवल ठंड से बचाव का साधन बना, बल्कि समाज के लिए मानवता, सहयोग और जिम्मेदारी का मजबूत संदेश भी छोड़ गया।

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