नजरबंदी की बेड़ियां तोड़ कलेक्ट्रेट पहुंचे जज सिंह अन्ना, बदहाल सड़कों के खिलाफ आमरण अनशन शुरू

बृज बिहारी दुबे
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​जौनपुर। जनपद की जर्जर सड़कों, मंडी परिषद की बदहाली और नाली विहीन मार्गों के मुद्दे पर प्रशासन के खिलाफ आर-पार की जंग छिड़ गई है। प्रशासनिक नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) की बाधाओं को पार करते हुए प्रखर समाजसेवी जज सिंह अन्ना आज मंगलवार को सुबह 10:30 बजे जिला कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया।
अनशन स्थल पर मीडिया से मुखातिब होते हुए जज सिंह अन्ना ने एक बड़ा विकल्प सुझाते हुए प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि मंडी परिषद, ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग और सिंचाई विभाग पिछले 25 वर्षों से इन सड़कों की मरम्मत कराने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। यदि ये विभाग बजट या इच्छाशक्ति की कमी के कारण सड़कें बनाने में सक्षम नहीं हैं, तो इन सड़कों को तत्काल लोक निर्माण विभाग (PWD) को हस्तांतरित कर देना चाहिए, ताकि जनता को गड्ढों से मुक्ति मिल सके।
अन्ना ने आरोप लगाया कि थाना बरसठी और मीरगंज की पुलिस द्वारा उन्हें 28 दिसंबर से ही घर में नजरबंद कर दिया गया था ताकि वे उपमुख्यमंत्री के दौरे के समय जनता की पीड़ा को न उठा सकें। उन्होंने कहा, "प्रशासन चाहे जितनी लाठियां या बंदिशें लगा ले, जब तक सांस चलेगी, जनता के हक की लड़ाई जारी रहेगी। ग्रामीणों को जलभराव और जर्जर रास्तों के नर्क में रहने को मजबूर करना अन्याय है।" 

अन्ना ने जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए अपनी प्रमुख मांगें दोहराईं:
1. सड़कों का हस्तांतरण: मंडी परिषद और सिंचाई विभाग की विफल सड़कों को अविलंब PWD को सौंपा जाए।
2. तत्काल जीर्णोद्धार: दो दशकों से लंबित सड़कों का निर्माण मानक के अनुरूप और नाली निर्माण के साथ शुरू हो।
3. जवाबदेही: सड़कों को बदहाल छोड़ने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
कलेक्ट्रेट परिसर में अन्ना के आमरण अनशन पर बैठते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है। मौके पर खुफिया तंत्र सक्रिय है। समाजसेवी जज सिंह अन्ना का स्पष्ट संकल्प है कि जब तक सड़कों के निर्माण या हस्तांतरण के लिए ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।

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