लखनऊ। भारतीय मतदाता महासभा (Bhartiya Matdata Mahasabha) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की चिर-लंबित मांग 'पूर्वांचल राज्य' की स्थापना को लेकर एक निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मिंटू राजभर ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि यह लड़ाई अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।
एजेंडे में शामिल हुआ 'पूर्वांचल राज्य संकल्प'
भारतीय मतदाता महासभा ने अपने सांगठनिक एजेंडे में 'पूर्वांचल राज्य की स्थापना के संकल्प' को सर्वोपरि स्थान दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मिंटू राजभर का मानना है कि पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश) क्षेत्र आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रहा है।
पिछड़ेपन का आधार: जनसंख्या घनत्व अधिक होने के बावजूद, शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों में यह क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य विकसित क्षेत्रों से काफी पीछे है।
प्रशासनिक असुविधा: एक विशाल और अत्यंत जनसंख्या वाले राज्य (उत्तर प्रदेश) में, क्षेत्रीय विकास पर ध्यान केंद्रित करना और प्रशासनिक दक्षता बनाए रखना मुश्किल हो गया है। राजभर का कहना है कि एक अलग राज्य ही इस क्षेत्र के त्वरित विकास का एकमात्र समाधान है।
जल्द ही होगा बड़े आंदोलन का शंखनाद
मिंटू राजभर ने संकेत दिया है कि भारतीय मतदाता महासभा जल्द ही एक विशाल जन आंदोलन शुरू करेगी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनता की भावनाओं को संगठित करके सरकार पर दबाव बनाना होगा।
> "अब बहुत हो चुका इंतज़ार। पूर्वांचल के मेहनतकश लोगों को उनके हक़ से वंचित नहीं रखा जा सकता। हमने संकल्प लिया है और इसे पूरा करके रहेंगे। यह लड़ाई तब तक नहीं थमेगी जब तक अलग राज्य का गठन नहीं हो जाता।"
> — मिंटू राजभर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय मतदाता महासभा
>
यह आंदोलन विभिन्न चरणों में चलाया जाएगा, जिसमें जन जागरूकता अभियान, पदयात्राएं, धरना-प्रदर्शन, और राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने के लिए रणनीति शामिल होगी। उनका जोर इस बात पर है कि इस मांग को क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जाए।
क्षेत्रीय राजनीति पर प्रभाव
मिंटू राजभर के नेतृत्व में भारतीय मतदाता महासभा द्वारा पूर्वांचल राज्य की मांग को पुनर्जीवित करना क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा उलटफेर ला सकता है।
दलित और पिछड़ा वर्ग का ध्रुवीकरण: पूर्वांचल क्षेत्र में दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी है, जो दशकों से आर्थिक असमानता और अवसरों की कमी से जूझ रही है। राजभर का यह कदम इन वर्गों को एक झंडे के नीचे लाने और एक मजबूत वोट बैंक बनाने की क्षमता रखता है।
अन्य दलों की चुनौती: महासभा का यह आंदोलन सत्ताधारी दल और विपक्षी दलों, दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करेगा, क्योंकि वे इस महत्वपूर्ण मांग पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए मजबूर होंगे।
संक्षेप में, भारतीय मतदाता महासभा ने पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग को फिर से मुख्य धारा में ला दिया है। मिंटू राजभर का यह 'सड़क से संसद तक संघर्ष' का ऐलान आने वाले दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को एक नई दिशा दे सकता है।
