सत्ता अहंकार में अपने प्रजा को हानि पहुंचाने का विचार हीं राक्षसी प्रवृत्ति है:सुश्री ब्रज प्रिया किशोरी जी

बृज बिहारी दुबे
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रिपोर्ट प्रेम प्रकाश शर्मा 

सिंदरी, धनबाद।सिंदरी शहरपुरा शिव मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस आज श्रीकृष्ण भगवान के बाल लिला का वर्णन तथा झांकी के द्वारा मंचन हुआ तथा कंश के राक्षसी प्रवृत्ति का वर्णन करते हुए सुश्री ब्रज प्रिया किशोरी जी ने बताया की सत्ता अहंकार में अपने प्रजा को हानि पहुंचाने का विचार हीं राक्षसी प्रवृत्ति है जैसे कंश ने सत्ता के मद में मदांध होकर बालक श्री कृष्ण वध के लिए पुतना नामक राक्षसनी को वेश बदलकर भेजा जिसने अपना रुप बदलकर गोद में उठाकर जैसे हीं उन्हें अपना विराट कुरुप चेहरा दिखाकर डराकर जहरीला दुग्धपान  करवाईं भगवान श्रीकृष्ण मुस्कराते हुए दुग्धपान करने लगे और पुतना चिल्लाने लगी है यह होता देख पुतना समझ गई की ये और कोई नहीं साक्षात भगवान हैं इस प्रकार भगवान को तो कुछ भी नहीं हुआ पर  पुतना का प्राणांत हो गया तो भगवान को हानी पहुंचाने के लिए जो भी सोचेगा उसका हश्र पुतना जैसा हीं होगा। माता यशोदा ने फिर पंचगव्य, गौमुत्र, गोबर से भगवान श्री कृष्ण का नहलाईं हैं। माखन चोरी लीलाएं करते हुए भगवान अपने भक्तों का चरण रज मिट्टी खाएं हैं।‌ गोपियां जब मातारानी यशोदा जी से माखन चोरी की शिकायत कीं हैं तो मां ने जब कृष्ण जी मुंह खोलकर दिखाने पर उन्हें मुख मंडल में ब्रह्मांड , आकाश, पाताल, पहाड़, द्वीप , समुद्र, पृथ्वी, चंद्रमा, तारा , त्रिभुवन, जयोतिर्मंण्डल, त्रिभुवन, जम्बूद्वीप भारतवर्ष, ब्रज, नंदबाबा का घर/गांव देखते हीं पहचान गईं । सुश्री ब्रज प्रिया किशोरी जी ने कहा की आज की युवा पीढ़ी अपने धर्म भगवान के प्रति विमुख हैं जिन्हें रामायण, श्रीमद्भागवत कथा समेत वेद पुराण ग्रंथों के अध्ययन गायन मनन मात्र से असिमित उर्जा संतुष्टि की प्राप्ति होगी जो भौतिक सुख से ज्यादा सुख देने वाला होगा चुकी भौतिक सुख क्षणिक है जबकि अध्यात्मिक सुख स्थायि है कुल समेत मोक्ष प्रदान करने वाला है जिससे बाल बच्चे नाती पोता संस्कारी होंगे। भगवान का नाम जप से बढ़कर कुछ भी नहीं है जो की काम करते हुए मन हीं मन स्मरण मनन किया जा सकता है। अलग से समय निकला तो अति उत्तम पर अगर न मिला उठते बैठते काम करते प्रभु का स्मरण से मन को शांति तृप्ति के साथ साथ भगवान समीप ले जाने में सहायक है जिसमें आनंद हीं आनंद की प्राप्ति होगी। भगवान की लीलाओं का वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा का वर्णन विस्तार से कहीं तथा संगीतमय कथा वाचन गायन से मंत्रमुग्ध भक्तगण श्रोता झुमते रहे। यहां तक की बाजार में में दुकानों पर बैठे दुकानदार ग्राहक भी आनंदित करने वाला गायन और कथा के बिच राधे राधे जय श्री कृष्ण, जय सियाराम जय श्री राम के उद्घोष से आनंदित होते रहे।।
              श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य रूप से यजमान अमोद कुमार सिंह संग धर्मपत्नी श्रीमती उषा सिंह, समेत सैकड़ों हजारों महिला पुरुष श्रद्धालु भक्तगण कार्यक्रम के अंत अंत तक झुमते गाते हुए भक्तिमय वातावरण का आनंद उठाए।

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