**मीरा-भाईंदर।** शादी, जिसे एक लड़की के लिए नए जीवन की शुरुआत और सुरक्षित भविष्य का आधार माना जाता है, अगर वही रिश्ता प्रताड़ना और जान के खतरे की वजह बन जाए, तो यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता का विषय है। मीरा-भाईंदर के नवघर पुलिस थाना क्षेत्र से सामने आया 23 वर्षीय नवविवाहिता आयुषी विशाल पांडे का मामला दहेज प्रथा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पीड़िता और उसके परिजनों का आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। आरोपों के मुताबिक, 17 अक्टूबर 2026 को कथित तौर पर उसे एक साथ करीब 40 गोलियां खिलाई गईं, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच तथा मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
## मामले के प्रमुख बिंदु
**1. शादी के बाद प्रताड़ना के आरोप**
शिकायत के अनुसार, आयुषी पांडे का विवाह दिसंबर 2025 में वाराणसी में हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। आरोप है कि शादी के बाद से ही दहेज और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता पक्ष ने 50 लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप भी लगाया है।
**2. एक साथ 40 गोलियां खिलाने का गंभीर आरोप**
पीड़िता पक्ष के मुताबिक, 17 अक्टूबर की सुबह करीब 8 बजे घरेलू विवाद के दौरान सास और ननद ने कथित तौर पर आयुषी के साथ मारपीट की। आरोप है कि ननद, जिन्हें परिवार डॉक्टर बताता है, ने उसे एक साथ करीब 40 गोलियां खिलाईं। परिजनों का दावा है कि इस घटना में परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
**3. अस्पताल में उपचार, परिवार को न्याय की उम्मीद**
बताया गया है कि घटना के बाद आयुषी की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता का उपचार पहले मीरा रोड के चिरायु और तुंगा अस्पताल में किए जाने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद उसे गोरेगांव के एक अन्य निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। परिवार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता पीड़िता का स्वास्थ्य, सुरक्षा और उसे न्याय दिलाना है।
**4. पति, सास, ससुर और ननद की भूमिका की जांच की मांग**
पीड़िता पक्ष की मांग है कि मामले में पति, सास, ससुर और ननद सहित सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। परिजनों का कहना है कि यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। किसी भी आरोपी की जिम्मेदारी केवल रिश्ते के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होनी चाहिए।
**5. नवघर पुलिस में FIR दर्ज, चार लोगों के खिलाफ मामला**
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवघर पुलिस ने 20 अक्टूबर 2026 को पति समेत चार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, 316(2), 351(2), 3(5) और 115(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक मुकुंद व्यंकटेश यादव को सौंपी गई है।
**6. पीड़िता और मामा ने डीसीपी से मिलकर रखी मांग**
पीड़िता के मामा बृजेश मिश्र का आरोप है कि पुलिस ने उनकी भांजी का बयान उचित तरीके से दर्ज नहीं किया। इसी को लेकर पीड़िता पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, विशेषकर डीसीपी राहुल चौहान से मुलाकात कर अपनी शिकायत और मांगें रखीं। परिवार चाहता है कि पीड़िता का बयान दोबारा दर्ज किया जाए, पूरे घटनाक्रम की गहन जांच हो और किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
**7. BNS की धारा 109 जोड़ने की मांग**
पीड़िता और उसके मामा की प्रमुख मांग है कि मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, यानी हत्या के प्रयास से संबंधित प्रावधान, लागू करने पर विचार किया जाए। उनका आरोप है कि ससुराल पक्ष की कथित हरकतों से आयुषी की जान को खतरा पैदा हुआ। परिवार चाहता है कि यदि जांच में हत्या के प्रयास के आवश्यक कानूनी तत्व प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ उचित धाराएं लगाकर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए।
**8. शासन-प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपील**
पीड़िता पक्ष का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। परिवार की मांग है कि मेडिकल रिपोर्ट, उपचार से संबंधित दस्तावेज, पीड़िता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से परखा जाए। साथ ही, पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
दहेज के नाम पर आखिर कब तक बेटियां प्रताड़ना सहेंगी?
दहेज कोई अधिकार नहीं, न ही किसी महिला को प्रताड़ित करने का बहाना है। विवाह के बाद किसी बेटी से पैसों की मांग करना, उसे कथित तौर पर शारीरिक या मानसिक यातना देना और उसकी जान को खतरे में डालने के आरोप लगना, समाज के सामने एक असहज सवाल खड़ा करता है—क्या शादी के बाद एक महिला की सुरक्षा और सम्मान की कोई गारंटी नहीं?
आयुषी पांडे के मामले में परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। एक ओर पीड़िता के साथ कथित तौर पर हुई घटना की गंभीरता है, तो दूसरी ओर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग। ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं है; जांच को साक्ष्य-आधारित, समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना भी जरूरी है।
परिवार की मांग स्पष्ट है—पीड़िता का बयान सही तरीके से दर्ज किया जाए, धारा 109 BNS लागू करने की मांग पर साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए और जिन लोगों की संलिप्तता प्रमाणित हो, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
**यह मामला केवल आयुषी और उसके परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि दहेज उत्पीड़न के खिलाफ समाज की सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है।** किसी भी बेटी को विवाह के बाद भय और प्रताड़ना के साये में जीवन बिताने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। कानून का उद्देश्य पीड़िता को सुरक्षा और न्याय देना तथा दोषियों को जवाबदेह ठहराना है।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है। आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएगी। मीरा-भाईंदर पुलिस की आगे की कार्रवाई पर पीड़िता के परिवार के साथ-साथ समाज की भी निगाहें टिकी हैं।
