नेपियर घास की मुहिम को पूरे भारत तक पहुंचाने का संकल्प: पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने प्रगतिशील किसान मूला सिंह को अंगवस्त्र देकर किया सम्मानित*

बृज बिहारी दुबे
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रिपोर्टर दीपक शुक्ला 

 *बिजनौर* । पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने निराश्रित गोवंश एवं पालतू पशुओं के लिए निरंतर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नेपियर घास की खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि एक बार रोपण के बाद कई वर्षों तक हरा चारा उपलब्ध कराने वाली नेपियर घास पशुपालकों और किसानों के लिए बेहद उपयोगी है।
डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि अपने सेवाकाल के दौरान जनपद बहराइच में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री की प्रेरणा से निराश्रित गोवंश एवं अन्य पालतू पशुओं के लिए हरे चारे की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नेपियर घास के रोपण का अभिनव प्रयास शुरू किया था। लगभग पांच-छह वर्ष पूर्व उन्होंने इस पहल को तत्कालीन मुख्य सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्र के समक्ष प्रस्तुत करने के साथ ही स्कॉच अवॉर्ड के लिए भी आवेदन किया था।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने इस अभिनव प्रयास का अवलोकन किया और इसे अन्य जनपदों में भी लागू किए जाने के निर्देश दिए। इसी क्रम में सेवानिवृत्ति के बाद भी वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाने में जुटे हैं, ताकि निराश्रित और पालतू गोवंश को लगातार पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध हो सके।
बिजनौर में प्रगतिशील किसानों के प्रयास से दिखी नई उम्मीद
डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने कहा कि अपने गृह जनपद बिजनौर के भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि यहां के किसान काफी प्रगतिशील हैं। अनेक किसानों ने अपने गन्ने के खेतों के किनारे तथा पशुओं की संख्या के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में नेपियर घास लगाई है।
इसी क्रम में हलदौर-नूरपुर मार्ग पर ग्राम धनौरा में उनकी मुलाकात किसान मूला सिंह से हुई, जो अपने खेत में नेपियर घास काट रहे थे। किसान के प्रयास से प्रभावित होकर डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा मिठाई खिलाई। किसान मूला सिंह ने भी आत्मीयता के साथ अपने हाथों से उन्हें मिठाई खिलाई। इस आत्मीय क्षण को याद करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि किसानों की सहजता और सरलता मन को छू जाती है।
पांच-छह वर्ष तक लगातार मिल सकता है हरा चारा
डॉ. सिंह ने बताया कि नेपियर घास की खासियत यह है कि एक बार रोपण करने के बाद कई वर्षों तक इससे हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार वर्ष में चार से पांच बार तक इसकी कटाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसान भी अपने खेतों के किनारे नेपियर घास लगाकर पशुओं के लिए वर्षभर हरे चारे की व्यवस्था कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बिजनौर-नूरपुर मार्ग पर छोटे-छोटे किसानों के खेतों में नेपियर घास देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। पशु भी इसे बड़े चाव से खाते हैं, जिससे पशुपालकों को हरे चारे की उपलब्धता में काफी मदद मिलती है।
दुष्यंत कुमार की पंक्तियों से किसानों में भरा उत्साह
इस अवसर पर डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने प्रसिद्ध कवि एवं गजलकार दुष्यंत कुमार की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी बड़े बदलाव की शुरुआत छोटे प्रयास से होती है—
“कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।”
उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का हंगामा खड़ा करना नहीं, बल्कि सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से परिस्थितियों में बदलाव लाना है। उन्होंने दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का स्मरण करते हुए कहा कि चाहे प्रयास उनका हो, किसानों का हो या समाज के किसी अन्य व्यक्ति का—आवश्यकता इस बात की है कि निराश्रित और पालतू पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
पूरे भारत में पहुंचाने का संकल्प
पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने कहा कि वह नेपियर घास की इस मुहिम को केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे पूरे भारत में पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने तथा सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों में नेपियर घास का रोपण किया जा रहा है। बहराइच, जौनपुर सहित अन्य जनपदों में भी इस दिशा में प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान को और अधिक विस्तार देने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक पशुओं को पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध हो सके।
सहारनपुर के रीमाउंट डिपो का दिया उदाहरण
डॉ. सिंह ने सहारनपुर स्थित रीमाउंट डिपो का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां सेना के माध्यम से घोड़ों की ट्रेनिंग होती है और रिसर्च सेंटर भी है। उन्होंने बताया कि वहां लगभग 90 हेक्टेयर क्षेत्र में नेपियर घास लगाई गई है, जिससे 1,200 से अधिक घोड़ों को लगातार हरा चारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार किसानों, ग्राम पंचायतों और पशुपालकों के स्तर पर योजनाबद्ध ढंग से नेपियर घास का रोपण किया जाए तो निराश्रित गोवंश के लिए हरे चारे की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मनरेगा के माध्यम से भी बढ़ावा देने पर मुख्यमंत्री का जताया आभार
डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने इस अभियान को ग्राम्य विकास विभाग और मनरेगा के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और किसानों के व्यक्तिगत प्रयासों को जोड़कर नेपियर घास के उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जो बेजुबान पशु अपनी जरूरत स्वयं नहीं बता सकते, उनके लिए हरे चारे की व्यवस्था करना समाज की जिम्मेदारी है। भारतीय संस्कृति में गोसेवा को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और प्रत्येक पशु की सेवा भी मानवीय संवेदना का परिचायक है।
अंत में पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने किसानों, पशुपालकों और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे नेपियर घास के रोपण अभियान का हिस्सा बनें और बेजुबान पशुओं के लिए निरंतर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने में अपना योगदान दें।

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