जौनपुर। मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र की बसुही नदी पर वर्षों से जर्जर पड़े पुल की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी के बाद खुद ही समाधान निकालने का फैसला किया। सीर गांव के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा कर लोहे की जाली का पुल बनवाने का कार्य शुरू कर दिया है। पुल निर्माण पूरा होने के बाद दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही तेजगढ़ स्थित मां दुर्गा देवी मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलेगी।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2002 में गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से इस पुल का निर्माण कराया था, लेकिन समय के साथ पुल जर्जर होकर टूट गया। पिछले करीब आठ वर्षों से पुल की हालत बेहद खराब थी। कई बार इसकी मरम्मत भी कराई गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। पुल जर्जर होने के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले कई लोग हादसों का शिकार हुए। ग्रामीणों के अनुसार सुरेंद्र, अमित, मनीष और प्रभु समेत कई लोग पुल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। किसी का पैर टूटा तो किसी के सिर में गंभीर चोट आई।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पक्के पुल की मांग की जाती रही, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी पुल निर्माण का वादा करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा भुला दिया जाता है। वर्तमान में मछलीशहर की सांसद प्रिया सरोज तथा मड़ियाहूं विधायक डॉ. आर.के. पटेल से भी पुल निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका।
सीर गांव के लाल साहब यादव, विकास, गणपत, अनिल, राजेश, फूलचंद पटेल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि मजबूर होकर गांव के लोगों ने चंदा जुटाकर पुल निर्माण का निर्णय लिया है। यह पुल बनने से कसियांव, काजीपुर, दरगाह, रामनगर, अढ़नपुर, छांगापुर, कटघर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और आम नागरिकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
ग्रामीणों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अस्थायी व्यवस्था के बजाय बसुही नदी पर जल्द से जल्द एक स्थायी और मजबूत पक्का पुल बनाया जाए, ताकि भविष्य में लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े और क्षेत्र के विकास को नई गति मिल सके।
