उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में थाना गोमती नगर विस्तार में कानून का खुल्लम खुल्ला मजाक देखना हो तो यहां पर हुई हालिया घटना पर एक नजर डालें तो पता चलता है कानून का मजाक कैसे बनाया जाता है यह घटना है अतुल कुमार तिवारी पुत्र श्री चंद्र प्रकाश तिवारी जो प्लाट संख्या 50 सरस्वती पुरम निकट कामाख्या मंदिर खरगापुर गोमती नगर विस्तार लखनऊ के रहने वाले हैं यह रात्रि में अपने बच्चों का कुछ सामान लेने के लिए बाहर निकले ।
जहां सामने ही किसान मोर्चा कार्यालय की आड़ में अवैध रूप से अवधी दरबार मे इन सभी अपराधियों का वहां पर जमावड़ा होता है और उनके साथी अक्सर ही वहीं बैठते हैं आए दिन यह लोग वहां पर ऐसे कृत्य करते रहते हैं।
और इसी क्रम में जैसे ही अतुल तिवारी वहां पहुंचे वहां पर पहले से ही खड़े अनूप यादव जो इनका इंतजार कर रहे थे जैसे उनको पता था किसी मुखबिर के द्वारा की अतुल तिवारी यहां आने वाले हैं और वहां पर पहले से खड़े अनूप यादव के द्वारा अतुल तिवारी को रोक कर जानकार पुराने वाद विवाद का हवाला देते हुए लड़ाई झगड़ा करने लगे और उनके साथ जो इस टीम को सरगना थे जो इस घटना को नियंत्रित कर रहे थे उनका नाम चंदन जायसवाल के संरक्षण में चार पांच व्यक्तियों द्वारा इन्हें बर्बरता पूर्वक मारा जाने लगा और ईंट पत्थर से सर फोड़ कर हत्या करने की प्रयास किया गया यह लोग पहले से ही पूरी तैयारी से अतुल कुमार तिवारी की हत्या करने का वहां पर तयशुदा प्लान था जब वहां पर राहगीरों द्वारा अचानक इस घटना को देखकर बीच बचाव किया गया तो यह लोग अपनी थार और वरना गाड़ी से भाग निकले इन लोगों का वहां अक्सर जमावड़ा रहता है और वहीं से अपने अपराधी के योजनाओं को सक्रिय और उनको अंजाम देते हैं अतुल तिवारी ने बताया घटना में विनय सिंह संजीव सिंह यादव अनूप यादव चंदन जायसवाल की योजना के मुताबिक उनके हिसाब से यह घटना कार्य 5 से 6 अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर यह घटना की गई है जो काफी मन बढ़ पर प्रकार के हैं और ऐसी घटना करने के लिए ऐसे लोग हिचकीचाते नहीं हैं हत्या मर्डर मारपीट करना इनके लिए आम बात है इन लोगों के लिए अतुल कुमार तिवारी काफी डरे और सहमे हुए हैं इन लोगों की आपराधिक इतिहास को देखते हुए, इन्होंने अपने साथ हुई घटना की जानकारी लिखित तहरीर थाना गोमती नगर विस्तार थाना प्रभारी को 20/06/2026 तारीख को एप्लीकेशन दिया इनकी तहरीर तक थाने में नहीं लिखी जा रही थी इन मनबढड सिरफिरो के दबाव में बहुत अधिक प्रयासों के बाद किसी तरह पुलिस ने उनकी तहरीर के आधार पर मुकदमा नंबर 111/ 2026 रात 10:54 पर 20 जून 2026 को ही दर्ज किया उसी दिन जिस दिन यह घटना हुई और जांच चालू हुई खानापूर्ति पुलिस के हिसाब से।
घटना में एक नया मोड़ तब आता है जब थाना प्रभारी गौरव बाजपेई और जांच करता अधिकारी आयुष यादव ने सामने वाली पार्टी से मिली भगत करके घटना के दो दिन बाद दिनांक 23 जून 2026 को रात्रि 8:46 पर एक क्रॉस FIR जो मुकदमा नंबर 113/ 2026 दूसरी लिख डाली इनके खिलाफ अतुल तिवारी के ही खिलाफ
जांच करता आयुष यादव जी अनूप कुमार यादव का पक्ष लेते हुए उल्टा आतुर तिवारी के ही खिलाफ एक और मुकदमा लिख डाला और पेशबंदी में क्रॉस FIR खड़ी कर दिया और उसे फिर को इस तरह से दिखाए जैसे अतुल तिवारी ही बहुत बड़े सरगना हो इनको ही चार-पांच व्यक्तियों के साथ वहां पर हमला करते हुए फिर को दर्ज कराया क्या उत्तर प्रदेश सरकार में ब्राह्मणों का उत्पीड़न बंद नहीं होगा सरकार के द्वारा क्या सरकार द्वारा अपराधियों को संरक्षण प्राप्त है और संबंधित थाना प्रभारी और जांच करता अधिकारी किस तरह से उत्पीड़न कर रहे हैं जब पहले फिर अतुल तिवारी की दर्ज थी 20 जून 2026 को और उसकी जांच चालू हुई तो फिर दिनांक 23 /06/2026 को दूसरा मुकदमा किस कहानी और किस प्रभाव में लिखा गया फिर पीड़ित आदमी को न्याय पर भरोसा ही कहां रह गया कानून पर कोई भी आदमी थाने पर किस भरोसे से जाएगा फरियादी बनाकर जाएगा थाने पर और थाने से उल्टा अपराधी बनकर ही आ जाएगा पुलिस की ऐसी गतिविधियों के द्वारा आखिर थाना गोमती नगर विस्तार किन बाहुबलियों के प्रभाव में आकर ऐसा कृत्य कर रही है और पीड़ित के खिलाफ ही सुनियोजित प्लान के तहत एवं ।
यदि उत्तर प्रदेश की राजधानी में ही ऐसी घटना थाने द्वारा अंजाम दे दिया जाए और पीड़ित को ही परेशान किया जाए तो पीडि़त न्याय के लिए कहां जाएगा जबकि वहां पर लगे कैमरे जो भी अलग-अलग कमरे हैं उनकी रिकॉर्डिंग और घटना के समय साक्ष्यों के संकलन में पुलिस देरी कर रही है जिससे अतुल तिवारी के साथ हुई घटना को वह कमजोर दिख सके इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस को पुलिस कलेक्ट करने में देरी कर रही है जिसे साक्ष्य मिटते चले जाएं और अपराधियों को बचाया जा सके।
इस प्रकार की पुलिस की संदिग्ध जांच व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति कानून से कैसे न्याय की उम्मीद कर सकता है कि जिन धाराओं में पीड़ित मुकदमा लिखाएं जिस धारा में वह अपने ऊपर भी मुकदमा लेकर एक कहानी में चला आए उसी धारा में तो आखिर पीड़ित जाए तो जाए कहां इस सरकार में क्या ब्राह्मण होना अपराध है सरकार में आखिर यह सरकार खुलकर यह कहा क्यों नहीं देती है कि ब्राह्मण उत्तर प्रदेश छोड़कर चले जाएं कितना उत्पीड़न होगा ब्राह्मणों का उत्तर प्रदेश में है कोई जवाब नहीं शासन प्रशासन द्वारा ऐसी घटना पर।
