ग्रेटर नोएडा में खुले गड्ढों से बढ़ता खतरा: प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

बृज बिहारी दुबे
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रिपोर्ट भोला ठाकुर 
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-1 में सी-14 और सी-38 मकानों के सामने पिछले 10-15 दिनों से एक बड़ा गड्ढा खुला पड़ा है, जिससे स्थानीय निवासियों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह गड्ढा किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहा है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।
आरडब्ल्यूए (RWA) महासचिव हरेन्द्र भाटी ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा शहर में आए दिन ऐसे गड्ढों की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “कोई इन गड्ढों में गिरकर अपनी जान गंवा रहा है तो कोई गंभीर रूप से घायल हो रहा है, लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार मानो किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं।”
हाल ही में नोएडा सेक्टर 94 में एक बड़ा हादसा सामने आया, जबकि इससे पहले सेक्टर 150 में भी गड्ढों की वजह से दुर्घटना हो चुकी है। इन घटनाओं के बावजूद भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय यह गड्ढा और भी खतरनाक हो जाता है, क्योंकि पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेतों का अभाव है। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी बनी हुई है।
आरडब्ल्यूए ने मांग की है कि ग्रेटर नोएडा को जल्द से जल्द “गड्ढा मुक्त” बनाया जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह स्थिति बनी है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, खुले गड्ढों को तुरंत भरने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि लगातार हो रहे हादसों और बढ़ते जनदबाव के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कब जागता है और शहरवासियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है।
RWA महासचिव हरेन्द्र भाटी

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