हिंदी साहित्य जगत के लिए यह अत्यंत गर्व और प्रसन्नता का विषय है कि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक एवं विश्व रिकॉर्ड धारक अर्पित सर्वेश को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘काव्यांगन’ द्वारा प्रतापगढ़ जनपद का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
अर्पित सर्वेश का यह मनोनयन केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान, हिंदी भाषा के प्रति अटूट समर्पण और समाज सेवा के प्रति उनकी निष्ठा का सच्चा सम्मान है। अल्प आयु में ही वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले अर्पित ने अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी हिंदी भाषा का गौरव बढ़ाया है।
संस्था द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह दायित्व आगामी दो वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। उल्लेखनीय है कि यह पद पूर्णतः निस्वार्थ सेवा पर आधारित है, जो अर्पित सर्वेश की त्यागमय भावना, समर्पण और साहित्य के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को और अधिक उजागर करता है।
इस महत्वपूर्ण दायित्व को सौंपते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमापति त्रिवेदी एवं राष्ट्रीय सचिव विवेक गोयल ने अर्पित सर्वेश की कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है।
साहित्यिक जगत के विद्वानों का मानना है कि अर्पित सर्वेश के नेतृत्व में प्रतापगढ़ में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को नई गति और नई दिशा प्राप्त होगी। उनकी ऊर्जा, रचनात्मक दृष्टिकोण और प्रेरणादायक व्यक्तित्व निश्चित रूप से नई पीढ़ी को साहित्य की ओर प्रेरित करेगा तथा हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगा।
यह नियुक्ति न केवल अर्पित सर्वेश की व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि समस्त प्रतापगढ़ जनपद और हिंदी साहित्य जगत के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण है।
इस अवसर पर अर्पित सर्वेश ने संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग के सदस्य डॉ. राधा कृष्ण दीक्षित के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से ही उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्था से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. संतोष शुक्ला ने भी अर्पित सर्वेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर अनेक विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।
