24 साल बाद नदेसर शूटआउट केस में बड़ा मोड़! डॉक्टर और फ़ार्मास्टिक फिर तलब, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी जिरह

बृज बिहारी दुबे
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वाराणसी वर्ष 2002 के चर्चित *नदेसर टकसाल शूटआउट मामले* में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विशेष न्यायाधीश *(एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेंद्र विक्रम सिंह* की अदालत ने वादी पूर्व सांसद *धनंजय सिंह* द्वारा दाखिल किए गए *धारा 311 के प्रार्थना पत्र* को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बचाव पक्ष के *प्ली ऑफ एलीबाई* के दो प्रमुख गवाहों — *डॉ. अरविंद कुमार सिंह* और *फ़ार्मास्टिक सुभाकर यादव* को पुनः जिरह के लिए तलब कर लिया है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि *12 फरवरी 2026* तय की है। खास बात यह है कि दोनों गवाह वर्तमान में दूसरे जिलों में कार्यरत सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए उनकी जिरह *वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग* के माध्यम से कराई जाएगी।

*24 साल से लटका केस, अदालत ने जताई सख्ती*

यह मामला वर्ष *2003 से सत्र परीक्षण में लंबित* है और इसे अदालत के *सबसे पुराने मामलों* में गिना जा रहा है। दोनों पक्षों का *साक्ष्य वर्ष 2021 में पूरा* हो चुका था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के चलते अंतिम फैसला नहीं हो सका।

हाईकोर्ट ने *धारा 482, संख्या 30523/2012* में आदेश दिनांक *6 नवंबर 2012* को यह निर्देश दिया था कि जब तक सत्र परीक्षण संख्या *461/2003* का निस्तारण नहीं होता, तब तक इस मामले में निर्णय न दिया जाए।
अब जब उस केस में *29 अगस्त 2025* को फैसला आ चुका है, तब इस प्रकरण में फिर से बहस शुरू हो पाई है।

*अदालत का अहम आदेश*

अदालत ने स्पष्ट कहा कि—
“यह प्रकरण न्यायालय का सबसे प्राचीनतम लंबित मामला है, अतः साक्षियों की जिरह अब किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।”

अदालत ने *मूल चिकित्सीय अभिलेख तलब करने की मांग* को खारिज कर दिया, लेकिन दोनों डॉक्टरों की *पुनः जिरह* की अनुमति दे दी।

*क्यों तलब किए गए डॉक्टर और फ़ार्मास्टिक?*

अधिवक्ताओं के अनुसार, घटना के समय अभियुक्त *अभय सिंह और संदीप सिंह* लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे थे।
इसी आधार पर बचाव पक्ष ने *प्ली ऑफ एलीबाई* (घटना के समय मौजूद न होने का दावा) किया था।
अब उसी इलाज से जुड़े डॉक्टर और फ़ार्मास्टिक से दोबारा जिरह कर सच्चाई परखने की तैयारी है।

*क्या है पूरा मामला?*

*4 अक्टूबर 2002* को पूर्व सांसद व तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ सफारी गाड़ी से जौनपुर लौट रहे थे।
जैसे ही वह वाराणसी के *कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल* के पास पहुंचे, तभी बोलेरो से उतरे *अभय सिंह और उनके 4-5 साथी* अचानक अंधाधुंध फायरिंग करने लगे।

*इस हमले में:*

धनंजय सिंह, गनर, ड्राइवर समेत कई लोग घायल हुए।

इलाके में भगदड़ मच गई। पुलिस ने घायलों को *मलदहिया स्थित सिंह मेडिकल* में भर्ती कराया, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए।

बाद में धनंजय सिंह की तहरीर पर *अभय सिंह, विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह, सतेन्द्र सिंह बबलू* समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

 *निष्कर्ष*

करीब *ढाई दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल शूटआउट केस* में अब एक बार फिर से सुनवाई तेज हो गई है।
12 फरवरी 2026 को होने वाली जिरह से यह तय हो सकता है कि *प्ली ऑफ एलीबाई सही है या सिर्फ बचाव की रणनीति।*

अब सबकी नजरें अदालत की अगली तारीख पर टिकी हैं, जहां यह केस एक निर्णायक मोड़ ले सकता

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