जौनपुर, 31 दिसंबर। "कौन भला स्वीकार करेगा, जीवन एक संग्राम नहीं है.इन पंक्तियों के साथ समाजसेवी जज सिंह अन्ना प्रशासन और विभागों की लापरवाही के खिलाफ बुधवार को दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन पर डटे रहे। प्रशासन की तमाम कोशिशों और दबाव के बावजूद अन्ना का संकल्प नहीं डिगा और उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक सड़कों के उद्धार का लिखित आदेश नहीं मिलता, वे अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।
अनशन स्थल पर मीडिया से बात करते हुए जज सिंह अन्ना ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (RES) की कार्यप्रणाली पर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि विभाग ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं कि— "हम सड़क बनाते तो हैं, लेकिन मरम्मत नहीं करते। हम 6 महीने बाद सड़क जिला पंचायत को हैंडओवर कर देते हैं।"
इस तर्क पर अन्ना ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "यह जनता के साथ छलावा है। जब जिला पंचायत के पास अपनी खुद की सड़कों के लिए बजट नहीं है, तो वह RES की जर्जर सड़कों का बोझ कैसे उठाएगी? विभाग मरम्मत के नाम पर सिर्फ जिम्मेदारी एक-दूसरे पर थोप रहे हैं।"
अन्ना ने जिला प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि मंडी परिषद और RES जैसे विभाग जो सड़कों के रखरखाव में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं, उनसे सड़कें वापस लेकर तत्काल लोक निर्माण विभाग (PWD) को हस्तांतरित की जाएं। PWD के पास ही सड़कों की मरम्मत के लिए नियमित बजट और तकनीकी क्षमता उपलब्ध है।
विदित हो कि कल रात प्रशासन ने कड़ाके की ठंड का हवाला देते हुए अन्ना को धरना स्थल से हटाने का प्रयास किया था, लेकिन आज सुबह वे पुनः पूरे जोश के साथ कलेक्ट्रेट पहुँच गए और अनशन जारी रखा। उनका कहना है कि यह लड़ाई अब निर्णायक दौर में है।
