किच्छा में सरकारी स्कूल के सामने कूड़ा डंपिंग से बढ़ा दुर्घटना का खतरा, आवारा सांडों का जमावड़ा

बृज बिहारी दुबे
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 रिपोर्ट कृष्ण माधव मिश्रा
 किच्छा उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा में स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज और जूनियर हाई स्कूल के सामने कूड़ा फेंकने की अनियमित प्रथा ने एक गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। सड़क किनारे लगातार कूड़ा डंप किए जाने से न केवल इलाके में भीषण दुर्गंध फैल रही है, बल्कि यह स्थान अब आवारा सांडों के जमावड़े का केंद्र बन चुका है, जिससे छात्रों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
 

 बच्चों की सुरक्षा खतरे में
सुबह और दोपहर के समय, खासकर बच्चों के स्कूल आने-जाने के दौरान, सांडों के झुंड के कारण सड़कों पर अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है। स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह स्थान अब बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है। कई अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए सड़कों पर खड़े होना पड़ता है। उनका कहना है कि नगरपालिका परिषद की उदासीनता के कारण यहाँ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों में रोष और नगर पालिका पर सवाल
स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर भारी रोष है। उनका आरोप है कि यह क्षेत्र अब अघोषित ‘कूड़ा डंपिंग ज़ोन’ बन गया है।
  निवासियों का कहना है कि नगर पालिका की ओर से सफाई की कोई नियमित व्यवस्था नहीं की जाती है।
  कूड़ा डालने वाले लोगों पर किसी भी तरह की जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।
एक अभिभावक ने सख्त लहजे में कहा, "यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील मामला है। प्रशासन को तुरंत इस पर ध्यान देना चाहिए और कूड़ा फेंकना पूरी तरह से बंद कराना चाहिए। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो नागरिक स्वयं विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।"

स्थानीय निवासियों ने तत्काल प्रभाव से नगर पालिका और प्रशासन से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की स्कूल के सामने और सड़क किनारे कूड़ा फेंकने पर तुरंत और सख्त प्रतिबंध लगाया जाए
  कूड़ा संग्रह के लिए निर्धारित स्थान कहीं और बनाया जाए।
   इलाके की नियमित और प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए, साथ ही आवारा सांडों को पकड़वाने की व्यवस्था की जाए।
   कूड़ा डालने वालों पर उचित जुर्माना लगाकर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

स्कूल जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली यह स्थिति कतई स्वीकार्य नहीं है। नगर पालिका परिषद, स्कूल प्रशासन और स्थानीय शासन को मिलकर तत्काल इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा और इलाके की स्वच्छता सुनिश्चित हो सके।

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