सिंदरी, धनबाद सिंदरी शहरपुरा शिव मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन आज दिनांक 03/11/2025 को भक्तगणों को प्रिया जी बताईं की कल 3 बजे से 7 बजे तक हीं श्रीमद्भागवत कथा होगा। श्रीकृष्ण भगवान के बाल लिलाओं समेत जीवन के महत्वपूर्ण लीला/प्रसंग/रासलीला का आनंदित तरीके से संगीतमय वर्णन तथा झांकी के द्वारा मंचन के द्वारा सुश्री ब्रज प्रिया किशोरी जी ने बताया की श्रीमद्भागवत कथा भगवान के विग्रह रुप का वर्णन है। भगवान श्रीकृष्ण भैया बलदेव संग मथुरा जाकर मल्लयुद्ध कर कंस का वध कर अधर्म पर धर्म के विजय का परचम फहराए। आगे रुक्मिणी प्रसंग में बताईं की रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी हैं जो नारायण से दुर नहीं रह सकतीं हैं इसलिए लक्ष्मी प्राप्ति के लिए नारायण का अराधना करें। रुक्मिणी और द्वारकाधीश की संगीतमय झांकी/भजन से भक्तगण आनंद में झुमते रहे। भागवत कथा कहने सुनने से भक्ति ज्ञान वैराग्य की उत्पत्ति से मोह शोक भय और आसक्ति से मुक्ति मिलती है तथा सत्य समर्पण और न्याय जैसे नैतिक गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रिया जी ने आगे बताया की कथा का सार हीं हम सबके जीवन का उद्देश्य हीं परमात्मा को पाना है जिससे हमें मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है जिससे हृदय में भक्ति आनंद और प्रेम के संचार से अहंकार और आसक्ति से उठकर संतत्व की प्राप्ति होता है। भागवत कथा हमें वर्तमान में जीना सिखाती है क्योंकि शोक अतीत से , आसक्ति वर्तमान से , और भय भविष्य से जुड़ा है।
भागवत कथा का मुल सदाचार है जिसको सुनने से नैतिक और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा मिलता है। सदाचार जीवन ज़ीने वाले को समाज में प्रतिष्ठा मिलती है जो भगवान के सबसे प्रिय भक्त वत्सल होते हीं होते हैं। माता गंगा में स्नान से तन और मन पवित्र होता है वैसे हीं श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से अंतरात्मा पवित्र होकर परमात्मा से जुड़ती है। प्रिया जी ने समस्त सिंदरी वासियों के लिए मंगलकामना करते हुए बताईं की संसार का मूल आधार और अत्यंत श्रेष्ठ में भी श्रेष्ठतम परम पुरुष अराध्य देव परमात्मा हैं। उसके प्राप्ति का साधन इस कलिकाल में सत्संग से जुड़कर श्रीमद्भागवत के मूल मंत्रों का अनुसरण एवं शरणागत हो जाना हीं मानव कुंजी है।
श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य अतिथि के रूप में धनबाद के पूर्व सांसद पशुपति नाथ सिंह पधारे थे साथ में शैलेश सिंह, रासबिहारी पाठक, भी उपस्थित थे,वहीं मुख्य रूप से यजमान अमोद कुमार सिंह संग धर्मपत्नी श्रीमती उषा सिंह, अखिलेश सिंह, रितेश पांडेय के साथ साथ प्रशांत कुमार दुबे, दिनेश सिंह, सुरेन्द्र सिंह, नकुल सिंह, ए के राय, बनवाली झा, रामायणि अमित राय, अर्चना सिंह, अंजना देवी, रंजना सिंह, वंदना, अनुराधा, दीपिका, योगिता, रानी देवी, रवि कुमार, राजीव कुमार, कमलेश, केशव, आदित्य, अक्षर, सत्येन्द्र पांडेय, सुनील, अंजनी तिवारी, नकुल सिंह, उषा तिवारी, रौनी, कमलेश सिंह, मंटन सिंह, रंजन सिंहा, संतोष कुमार, स्वामीनाथ पांडेय, सत्येन्द्र नाथ तिवारी, हरिश्चंद्र दुबे , बिकेश सिंह, जितेंद्र यादव, अमित यादव, सुमन चौधरी, संपा सिल, डाक्टर एस एस साहु, बिनोद कुमार प्रसाद, विजय सिंह, राजु तिवारी, अभीषेक वाजपेई अनामिका तिवारी, यशोदा देवी, राधा शर्मा, समेत सैकड़ों हजारों महिला पुरुष श्रद्धालु भक्तगण कार्यक्रम के अंत अंत तक झुमते गाते हुए भक्तिमय वातावरण का आनंद उठाए और रात 10.30 में भोग अर्पण वितरण सुसंपन्न होने पर प्रसाद लेकर गंतव्य की ओर प्रस्थान किए।
