वाराणसी के पाण्डेयपुर में "All India Pvt ITI TP- Association" के तत्वाधान में प्रेस-वार्ता की गयी

बृज बिहारी दुबे
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रिपोर्ट एस बी सिंह निडर

 प्रेस वार्ता का मुख्य विषय इस प्रकार है-

1. टी.पी. (Training Partner) द्वारा यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) के माध्यम से देशभर में लाखों अकुशल प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षित कर रोज़गार की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया। परन्तु सरकार द्वारा उनका प्रशिक्षण व्यय जो केन्द्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा वहन किया जाना था, किन्तु 9 माह व्यतीत हो जाने के बाद भी अभीतक भुगतान नहीं हो पाया है। सभी संचालकों ने प्रशिक्षकों का वेतन, बिजली बिल, Tools Equipment & Machinery का क्रय किया जाना, Infrastructure इत्यादि का व्यय स्वयं के मद से किया, इस हेतु धन का प्रबन्ध विभिन्न श्रोतों से लोन लेकर पूर्ण किया। भुगतान न होने के कारण उक्त लोन का निस्तारण न हो पाने से सभी टी.पी. संचालक हतप्रभ हैं।

2. टी.पी. संचालकों के संचालन केन्द्रों पर थर्ड पार्टी के माध्यम से फेक जाँच कराकर उन संस्थानों के उपर अनर्गल आरोप लगाकर उनके उपर फर्जी मुकदमे लगाकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धुमिल किया जा रहा है। साथ ही साथ उन संस्थानों का भुगतान रोक दिया गया तथा उनपर अर्थदण्ड भी लगाया जा रहा है। जिससे सभी संचालक हैरान एवं परेशान हैं तथा उनके मन में NSDC के प्रति रोष का भाव उत्पन्न हो रहा है।

3. टी.पी. संचालकों के प्रति NSDC के द्वारा उपेक्षात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। NSDC का कोई भी सक्षम अधिकारी टी.पी. की समस्याओं के निस्तारण के प्रति जवाब देह नहीं हो रहा है।

इसी सन्दर्भ में देशभर से इकट्ठा हुये टी.पी. संचालकों ने प्रेस वार्ता के माध्यम से यह अनुरोध किया है कि सरकार 15 नवम्बर 2025 तक उपरोक्त सभी समस्याओं का निस्तारण करे, अन्यथा की दशा में टी.पी. संचालकों का सरकार पर से भरोसा उठ जाएगा। इसके पश्चात् देशभर के सभी संचालक जन्तर-मन्तर दिल्ली में इकट्ठा होकर अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए विवश होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी।

प्रेस वार्ता में All India Pvt ITI TP Association द्वारा देशभर से सैकड़ो की संख्या में आये हुये टी.पी. में से आशुतोष श्रीवास्तव, पवन चौधरी, मार्कण्डेय सिंह, गनोज कुमार, डॉ. पुरुषोत्तम कुमार यादव, राकेश सिंह, जनार्दन शर्मा, उद्धम सिंह यादव, लाल बहादुर यादव, आदित्य यादव, जितेन्द्र, सुनील सिंह, अमन द्विवेदी इत्यादि लोगों ने अपनी ब्यथा बताते हुये अपनी बात रखी।

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