रिपोर्ट एस बी सिंह निडर
यह शोभायात्रा गुरुद्वारा गुरुबाग, लक्सा से प्रारंभ होकर बेनिया, लहुराबीर, मलदहिया, सिगरा, रथयात्रा मार्गों से होते हुए पुनः गुरुबाग पर आकर संपन्न हुई।
इस अवसर पर हजारों की संख्या में सिख श्रद्धालु उपस्थित रहे। वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से भी सिख समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने अलग-अलग टोलियों में निहाल होते हुए गुरबाणी कीर्तन, ढोल-नगाड़े, झांकी और परचमों के साथ नगर कीर्तन को जीवंत बना दिया।
पूरे मार्ग में जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयघोष गूंजते रहे।
राहगीर और स्थानीय लोग भी नगर कीर्तन का स्वागत करते हुए फूलों की वर्षा करते नजर आए। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने नगर कीर्तन की व्यवस्थाओं के लिए विशेष तैयारियाँ की थीं। सेवादारों ने जलपान, चिकित्सा और सुरक्षा की व्यवस्था संभाली।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु नानक देव जी महाराज की शिक्षाओं, मानवता, समानता और सेवा भाव को आत्मसात करने का संकल्प लिया। शोभायात्रा का समापन गुरुबाग पहुंचकर अरदास और कीर्तन दरबार के साथ हुआ, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए गुरु का लंगर आयोजित किया गया।
