रिपोर्ट एस बी सिंह निडर
पेडागॉजी, असेसमेंट एंड केस-बेस्ड टीचिंग स्किल्स इन साइंस फॉर हायर एजुकेशन” विषयक ऑनलाइन शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारम्भ हुआ। मुख्य अतिथि प्रो० भारतेन्दु कुमार सिंह, निदेशक, पीडीपीएम भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन एवं विनिर्माण संस्थान, जबलपुर रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो० अशीष श्रीवास्तव, अधिष्ठाता (शिक्षण एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने की।
प्रो० भारतेन्दु कुमार सिंह, निदेशक, पीडीपीएम भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन एवं विनिर्माण संस्थान, जबलपुर ने विज्ञान के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और केस-आधारित शिक्षण कौशल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये कौशल किसी भी विज्ञान शिक्षक को एक उत्कृष्ट शिक्षक बनाते हैं। आज की तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में ऐसे शिक्षकों की अत्यंत आवश्यकता है, जो ज्ञान सृजन और नवाचार को प्रोत्साहित कर सकें। उन्होंने बताया कि भारत अब शोध प्रकाशनों के मामले में चीन और अमेरिका के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और शोध ही भारत को वैश्विक शिक्षा नेतृत्व की दिशा में आगे ले जा सकते हैं। प्रो० अशीष श्रीवास्तव, अधिष्ठाता (शिक्षण एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई ने सभी प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन में अत्यंत सार्थक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस कार्यक्रम में एक उत्सुक शिक्षार्थी के रूप में भाग लें, क्योंकि सीखना एक आजीवन प्रक्रिया है जो “वोम्ब टू टोम्ब” अर्थात जन्म से जीवन के अंत तक चलती रहती है।
दूसरे सत्र में डॉ० कुशाग्री सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, आईयूसीटीई ने “रीइमैजिनिंग साइंस पैडागॉजी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने ट्रेडिशनल लेक्चर-बेस्ड टीचिंग से आगे बढ़कर एक्टिव और लर्नर-सेंट्रिक मॉडल अपनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। साथ ही, चौथे सत्र में उन्होंने “एक्टिव लर्निंग टेक्नीक्स” पर बात की और क्लासरूम में स्टूडेंट्स को इंगेज करने के प्रैक्टिकल स्ट्रैटेजीज़ पर चर्चा की। तृतीया सत्र में, डॉ० आनंद कुमार ठाकुर, रांची विश्वविद्यालय, रांची ने “डिज़ाइनिंग लर्निंग आउटकम्स एंड लेसन प्लान्स” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने साइंस कोर्सेज़ के लिए क्लियर और मेज़रेबल लर्निंग ऑब्जेक्टिव्स तैयार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से बनाई गई लेसन प्लान्स इफेक्टिव टीचिंग की नींव होती हैं और स्टूडेंट्स के लर्निंग आउटकम्स को मज़बूत बनाती हैं।
कार्यक्रम में देश के 16 से अधिक राज्यों- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, झारखंड, और महाराष्ट्र आदि से 60 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के संयोजक डॉ० ज्ञानेंद्र सिंह, आईयूसीटीई, डॉ० कुशाग्री सिंह, आईयूसीटीई, और डॉ० राज सिंह, आईयूसीटीई हैं।
