मेरे सपनों का सुनहरा भारत विषय पर पेंटिंग कार्यशाला का आयोजन

बृज बिहारी दुबे
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वाराणसी मेरे सपनों का भारत वह है जहाँ शिक्षा, खेल, समानता आदि हर पहलू में विकास हो और अपनी पूरी क्षमता को प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध हों। यह एक ऐसा देश है जहाँ सभी संस्कृतियाँ और सभी पृष्ठभूमि के लोग सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ आते हैं, जहाँ स्वास्थ्य सेवा भी सभी के लिए बिना किसी कठिनाई के उपलब्ध है। यही मेरे सपनों का भारत है। यह मेरे सपनों के भारत को व्यक्त करने का एक संक्षिप्त तरीका है।उक्त विचार डॉ महेंद्र पाण्डेय (पूर्व कैबिनेट मंत्री,भारत सरकार)ने केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ, वाराणसी के अतिश सभागार में कहीं। विदित हो कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, सेवा की भावना का उत्सव मनाने और एक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने हेतु एक राष्ट्रव्यापी पहल के रूप में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक 'सेवा पर्व' का आयोजन कर रहा है। इस पहल के तहत, संस्कृति मंत्रालय ने देश भर के विभिन्न शहरों की पहचान की है, और वाराणसी में केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान को एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में माना है। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में मेरे सपनों का सुनहरा भारत विषय पर पेंटिंग कार्यशाला का आयोजन 24 सितंबर को अतिश सभागार में किया गया। विशिष्ट अतिथि के अशोक तिवारी (मेयर, वाराणसी) कहा कि
भारत सरकार के सेवा पर्व कार्यक्रम की मुख्य थीम "विकसित भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित राष्ट्रव्यापी उत्सव" है। जिसमें सेवा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक गौरव पर जोर दिया गया है। यह पर्व 2 अक्टूबर 2025 को महात्मा गांधी की जयंती पर समाप्त होता है, जो सेवा और विकास के मूल्यों का प्रतीक है।
कुलपति प्रो डब्ल्यू डी नेगी ने कहा अध्यक्षता करते हुए कहा कि जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव तथा सेवा पर्व नागरिकों को सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त करने और उनमें सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान करता है, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है। यह 'विकसित भारत' की ओर अग्रसर राष्ट्र के सपने को साकार करने में नागरिकों को भागीदार बनाता है, जो देश के विकास में उनकी रचनात्मक और सक्रिय भूमिका पर ज़ोर देता है। 
सेवा पर्व के तहत स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण,पेंटिंग, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन का अर्थ है, नागरिकों में पर्यावरणीय चेतना बढ़ाना और स्वच्छ व सुंदर परिवेश बनाने में मदद करना।इस पर्व के दौरान विभिन्न संस्थान अपनी कलाकृतियों, तस्वीरों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक जीवंतता का प्रदर्शन करते हैं। कार्यक्रम में प्रो.मंजुला चतुर्वेदी(पूर्व अध्यक्ष, चित्रकला विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) प्रोफेसर रीता सिंह (प्राचार्य, महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ने भी अपने विचार रखे। संचालन उपकुलसचिव हिमांशु पांडेय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ सुनीता चंद्रा ने किया।इस कार्यशाला में शहर भर से लगभग 650 छात्रों ने पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया।

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