साई मंदिर, गाजियाबाद श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन

बृज बिहारी दुबे
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 रिपोर्ट - भोला ठाकुर 
गाजियाबाद साई मंदिर, गाजियाबाद में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा आज भंडारे के साथ भक्तिभाव एवं हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। हरिद्वार से पधारे मोहन गोकुलधाम पीठाधीश्वर **कृष्णा संजय जी महाराज** ने सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक वर्णन करते हुए कलयुग के दुर्गुणों तथा उसमें निहित दिव्य गुणों पर गहन प्रकाश डाला।

महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज साक्षरता तो बढ़ रही है, किंतु अपनी संस्कृति की शिक्षा और दीक्षा का अभाव चिंतनीय है। हिंदू समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, अपने संस्कारों को सुदृढ़ करना होगा और सनातन मूल्यों को आत्मसात करना होगा। उन्होंने जागरण का आह्वान करते हुए कहा—“अभी भी समय है, जागो और अपनी संस्कृति को बचाओ।”

कथा में परीक्षित मोक्ष प्रसंग का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। साथ ही महाराज श्री ने महर्षि **व्याघ्रपाद** की प्रेरक कथा सुनाई। पुराणों में वर्णित यह महान ऋषि भगवान शिव के अनन्य भक्त माने जाते हैं और विशेष रूप से चिदंबरम् स्थित **नटराज मंदिर** से उनका गहरा संबंध बताया गया है।

‘व्याघ्रपाद’ का अर्थ है – व्याघ्र (बाघ) के समान चरण वाले। कथा के अनुसार वे प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा हेतु वन से ताजे और निष्कलंक पुष्प लाते थे। मधुमक्खियों द्वारा पुष्पों का रस लेने से उनका हृदय व्यथित होता, क्योंकि उनकी भावना केवल शिव को सर्वोत्तम अर्पित करने की थी। उनकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें व्याघ्र समान तीक्ष्ण नख और शक्तिशाली चरण प्रदान किए, जिससे वे ऊँचे वृक्षों पर चढ़कर शुद्ध पुष्प संकलित कर सकें। अंततः स्वयं नटराज रूप में भगवान ने उन्हें दर्शन दिए।
व्याघ्रपादमहर्षिं तं शिवभक्तिपरायणम्।
नटराजप्रसादेन सिद्धिं प्राप्तं नमाम्यहम्॥
ॐ नटराजाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात्
 यह प्रसंग सिखाता है कि जब भक्ति निर्मल और समर्पित होती है, तब ईश्वर स्वयं साधक को समर्थ बना देते हैं।

इस अवसर पर समस्त तुलस्यान परिवार कथा के यजमान रहे तथा **अमृताज वीरांगना संगठन** का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। कथा उपरांत दादी के भजनों पर श्रद्धालु आनंद और उत्साह के साथ झूम उठे। महाराज श्री ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंत में वृक्षारोपण भी किया गया। महाराज श्री ने संदेश दिया—“एक पुत्र दस वृक्षों के समान है। प्रकृति रहेगी तो हम और आप रहेंगे; यदि प्रकृति नहीं रहेगी तो जीवन कहाँ रहेगा?”

महाराज श्री 22 फरवरी 2026 से दिल्ली में आगामी कथा हेतु प्रस्थान करेंगे और संपूर्ण भारतवर्ष में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं धर्मजागरण का अभियान निरंतर आगे बढ़ाएँगे।

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