अयोध्या मिल्कीपुर तहसील के रामपुर जोहन गांव में एक विधवा महिला का राशन कार्ड मामला अब संवेदनहीन प्रशासन और संदिग्ध कार्रवाई की मिसाल बनता जा रहा है। खबर प्रकाशित होने के बावजूद सप्लाई इंस्पेक्टर मिल्कीपुर ने अब तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की, उल्टे पीड़ित महिला से ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो कानून और व्यवहार—दोनों से परे हैं।विधवा प्रेम कुमारी का आरोप है कि उनका राशन कार्ड पहले स्वयं सप्लाई इंस्पेक्टर की जांच के बाद जारी किया गया, लेकिन बाद में जेठानी बिंदु लता के विरोध और प्रार्थना पत्र के दबाव में बिना सुनवाई कार्ड काट दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि अब महिला से शादी का कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है—जबकि वह विधवा हैं और वर्षों से विभागीय अभिलेखों में दर्ज हैं।महिला का पति स्व. सुनील कुमार उपाध्याय का निधन हो चुका है। वरासत का मामला अभी उप जिलाधिकारी न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद प्रभारी तहसीलदार के आदेश का हवाला देकर पूर्ति निरीक्षक ने राशन कार्ड निरस्त कर दिया। नियमों के अनुसार, न तो ग्राम प्रधान को सूचना दी गई, न ही महिला को सुनवाई का अवसर मिला।खबर चलने के बाद एसडीएम मिल्कीपुर सुधीर कुमार ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राशन आज भी बहाल नहीं हुआ। महिला भुखमरी की कगार पर है और सिस्टम कागजों में उलझाकर उसे और कमजोर करने में जुटा दिख रहा है।
सवाल सीधे हैं—जब पहले जांच कर राशन कार्ड जारी हुआ, तो अब वही जांच अमान्य कैसे?
विधवा महिला से कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट मांगना किस नियम के तहत?क्या पारिवारिक विरोध के आधार पर सरकारी लाभ छीना जा सकता है?
खबर और जांच आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों ठप?यह मामला सिर्फ एक राशन कार्ड का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदना और जवाबदेही का है।अब देखना यह है कि प्रशासन विधवा की थाली लौटाता है या फाइलों में उसे भूखा ही छोड़ देता है।
