आईआईटी मुंबई के हॉस्टल नंबर १४ के पास कबाड़ रखे गए क्षेत्र में दो भारतीय अजगर पाए गए। लगभग १० और ११ फीट लंबे इन अजगरों का सफल रेस्क्यू अम्मा केयर फाउंडेशन (एसीएफ) और प्लांट एंड एनिमल्स वेलफेयर सोसाइटी – मुंबई (पॉज-मुंबई) के स्वयंसेवकों अभिजीत चव्हाण, चंद्रमणि यादव एवं उनके सहयोगियों द्वारा किया गया। यह रेस्क्यू अविनाश कदम द्वारा किए गए तत्काल कॉल के बाद संभव हो पाया।
एसीएफ पॉज-मुंबई के संस्थापक एवं मुंबई शहर के मानद वन्यजीव रक्षक (ऑनरेरी वाइल्डलाइफ वार्डन) सुनीश सुब्रमण्यन कुंजु ने बताया कि दोनों अजगरों को सुरक्षित रूप से पकड़ा गया, जिसके बाद वन्यजीव पशुचिकित्सक डॉ. मनीष पिंगळे द्वारा उनकी स्वास्थ्य जांच की गई। घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई और नियमानुसार दोनों अजगरों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
कुंजू ने आगे बताया कि भारतीय अजगरों का प्रजनन काल (मेटिंग सीजन) सामान्यतः ठंडे और शुष्क महीनों में सितंबर–अक्टूबर से अप्रैल के बीच होता है। फरवरी से मई का समय प्रजनन के लिए सबसे अधिक सक्रिय माना जाता है। तापमान में होने वाले मौसमी बदलाव इस प्रजाति की प्रजनन प्रक्रिया के अनुकूल होते हैं, जिससे बच्चे गर्म मौसम में बाहर आते हैं।
नागरिकों से अपील है कि यदि कोई वन्यजीव संकट में दिखाई दे, तो हैलो फॉरेस्ट १९२६ या एसीएफ पॉज-मुंबई हेल्पलाइन ९८३३४८०३८८ पर तुरंत संपर्क करें।
