भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा प्रहार: यूपी में अब बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टर होंगे निलंबित!

बृज बिहारी दुबे
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*26 अक्टूबर को दैनिक जनसंपर्क भारत एवं दैनिक मुरैना केसरी एवं केएस फास्ट न्यूज़ एवं बीएमएफ न्यूज़ नेटवर्क में प्रकाशित एके बिंदुसार के बयान की असर*।



नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की ब्रांडेड दवाएँ लिखने और ओपीडी समय में अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों पर अब गाज गिरेगी। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए निलंबन तक की कार्यवाही का सख्त निर्देश जारी किया है। यह बड़ा निर्णय भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी की लगातार माँग और प्रयासों का परिणाम है, जिसकी सराहना स्वयं BMF के संस्थापक ने की है।
 शासन का सख्त निर्देश: क्या है सरकार का बड़ा फैसला?
स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने यह निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में निम्नलिखित नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी:
  बाहर की दवा लिखने पर निलंबन: यदि कोई डॉक्टर सरकारी अस्पताल की पर्ची के बजाय सादी पर्ची पर बाहर की ब्रांडेड दवाएँ लिखते हुए पाया जाता है, तो उसे निलंबित किया जाएगा।
  OPD से अनुपस्थिति पर जिम्मेदारी: ओपीडी (Out-Patient Department) के निर्धारित समय में डॉक्टर के उपस्थित न होने पर केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराए जाएँगे।
  निरीक्षण टीम का गठन: आदेशों के अनुपालन की जाँच के लिए 15 नवंबर के बाद शासन स्तर की टीमें विभिन्न जिलों के अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगी।
 मरीज कर सकते हैं सीधी शिकायत
इस निर्देश के तहत, मरीजों को भी अधिकार दिया गया है कि यदि कोई डॉक्टर उन्हें बाहर की दवा लिखने या अनावश्यक दवाएँ खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो वे इसकी शिकायत संबंधित अस्पताल के उच्चाधिकारियों से कर सकते हैं। यदि वहाँ सुनवाई नहीं होती, तो वे महानिदेशक स्वास्थ्य को भी पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
BMF की जीत: भ्रष्टाचार पर जोरदार एक्शन
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल ग्रुप कमेटी की ओर से बयान जारी करते हुए संस्थापक एके बिंदुसार ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस बड़े एक्शन के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को बधाई दी।
उन्होंने बताया कि:
  पिछले कई महीनों से उन्हें मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, चंदौली और वाराणसी जनपदों सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में बाहर से दवाएँ लिखने और मरीजों को परेशान करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
  इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने सरकार से स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार माँग उठाई थी।
  दैनिक जनसंपर्क भारत एवं मुरैना केसरी समाचार पत्र एवं  के एस फास्ट न्यूज़ एवं बीएमएफ न्यूज़ नेटवर्क में 26 अक्टूबर को एके बिंदुसार की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी, जिसे सरकार ने गंभीरता से लिया और यह बड़ा फैसला किया।
एके बिंदुसार ने कहा कि यह निर्णय सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जहाँ गरीब मरीजों को जानबूझकर बाहर की महंगी दवाएँ लिखने के चलन से मुक्ति मिलेगी।

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