घाट पर अव्यवस्था का बोलबाला: राजेपुर में नाव बंद होने से हाहाकार, फिसलन से घायल हुईं महिलाएं*बड़ी ख़बर -राजेपुर, उदयपुरा, विजयपुर घाट से (आज सुबह 10:00 बजे तक)

बृज बिहारी दुबे
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राजेपुर। पवित्र स्नान पर्व पर राजेपुर, विजयपुर और उदपुर घाटों पर प्रशासन की घोर लापरवाही और अव्यवस्था के चलते लाखों स्नानार्थियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी परेशानी नाव सेवा को अचानक बंद कर देने से हुई, जिसके कारण नदी पार करने वाले श्रद्धालु घाट पर तड़पते रहे। वहीं, फिसलन रोकने के लिए कोई इंतजाम न होने से कई महिलाएं गिरकर घायल हो गईं।
🚨 *नाव बंदी पर जन-आक्रोश: 'अन्ना' ने खुलवाया रास्ता*
राजेपुर घाट पर अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन ने अचानक नाव का आवागमन पूर्णतः बंद कर दिया। इससे नदी के दोनों किनारों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया और अफरा-तफरी मच गई।
समाजसेवी 'जज सिंह अन्ना' ने अव्यवस्था पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने तत्काल जिला कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुनय-विनय किया। उनके दबाव और प्रयासों के बाद, प्रशासन ने सीमित शर्तों के साथ नाव चलाने की अनुमति दी।

*महत्वपूर्ण फैसला*: 'अन्ना' के हस्तक्षेप के बाद, नाव पर एक बार में केवल 5-5 लोगों के आवागमन का परमिशन हुआ है। हालांकि, नाव सेवा शुरू होने के बावजूद, घाट पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से 'अन्ना' की तीखी झड़प हुई, क्योंकि पुलिस बल अब भी नावों के संचालन का विरोध कर रहा था।

⚠️ *फिसलन बनी मुसीबत:* कई महिलाएं घायल
घाट पर दूसरी सबसे गंभीर अव्यवस्था फिसलन को लेकर रही। स्नान के लिए घाट पर सरपत (सूखी घास) नहीं फेंकी गई है, और न ही चटाई बिछाई गई है।
इस कारण घाट की सीढ़ियाँ और किनारे बेहद फिसलन भरे हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसकी वजह से कई महिला स्नानार्थी फिसल गईं, जिससे उनके पैर और शरीर में चोटें आई हैं। प्रशासन की इस लापरवाही पर श्रद्धालुओं में भारी रोष है। 'अन्ना' ने इस अव्यवस्था के लिए भी अधिकारियों से कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

📈 *ढाई लाख ने किया स्नान, 5 लाख का अनुमान*
तीनों घाटों—राजेपुर, विजयपुर और उदपुर—पर सुबह 10:00 बजे तक ही ढाई लाख से अधिक लोग पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं। घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, और अनुमान है कि दिन के अंत तक यह संख्या 5 लाख तक पहुंच सकती है।
घाटों पर पुलिस की भारी व्यवस्था तैनात है, लेकिन उनकी प्राथमिकता व्यवस्था बनाने की बजाय नाव चलने का विरोध करने पर अधिक रही।
बड़ा सवाल: लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से की गई ये दोहरी अव्यवस्था (नाव बंदी और फिसलन) गंभीर सवाल खड़ा करती है। समाजसेवी को हस्तक्षेप कर घाट की मूलभूत व्यवस्था बहाल करानी पड़ी।*डीएम साहब के आदेश पर पुलिस की वोट ने मात्र एक दो चक्कर ढोने का निर्णय लिया*

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