जब तक सूरज चांद रहेगा याद करेगा उन्हें वतन उन्हें वतन

बृज बिहारी दुबे
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चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य एवं विश्व विजेता सम्राट अशोक के आदर्श भारत एवं आधुनिक युग के अखण्ड भारत के  निर्माता लौह पुरुष - भारत रत्न सरदार पटेल के पावन चरणों में शत्-शत् नमन*

एके बिंदुसार 
संस्थापक 
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी नई दिल्ली ।

 सरदार पटेल:प्राचीन सम्राटों की विरासत और आधुनिक भारत के शिल्पी
सरदार वल्लभभाई पटेल को अक्सर आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है, और उनकी तुलना भारतीय इतिहास के दो महानतम शासकों—चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और उनके पोते सम्राट अशोक महान—से की जाती है। यह तुलना उनके व्यक्तित्व में निहित दृढ़ इच्छाशक्ति, कूटनीतिक कौशल, राष्ट्र को एकजुट करने की क्षमता और स्थायी प्रशासनिक ढाँचा स्थापित करने के उनके अद्भुत कार्य के कारण की जाती है।
*🗡️ चंद्रगुप्त मौर्य का आदर्श:अखंडता और दृढ़ संकल्प*
यह कहना उचित होगा कि सरदार पटेल ने अपने जीवन में चंद्रगुप्त मौर्य के ध्येय को एक आदर्श के रूप में अपनाया। चंद्रगुप्त ने अपने गुरु चाणक्य के मार्गदर्शन में भारत को विदेशी शासन (यूनानी) और विखंडित शासन (नंद वंश और जनपदों) से मुक्त कर एक विशाल और अखंड मौर्य साम्राज्य की नींव रखी।
पटेल के कार्यों में यही एकीकरण का संकल्प दिखाई देता है:
 *रियासतों का एकीकरण:* स्वतंत्रता के समय, भारत में 560 से अधिक देशी रियासतें थीं, जिनमें से कई स्वतंत्र रहने का सपना देख रही थीं। पटेल ने, तत्कालीन ब्रिटिश भारत के एकीकरणकर्ता के रूप में, कूटनीति, समझौता और जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ सैन्य बल (जैसे हैदराबाद और जूनागढ़ में) का उपयोग करके इन रियासतों को भारतीय संघ में विलय किया।
 *लौह पुरुष की दृढ़ता:* चंद्रगुप्त की तरह ही, पटेल अपने लक्ष्य के प्रति अडिग थे। रियासतों के राजाओं से बातचीत के दौरान उन्होंने जो दृढ़ता और व्यावहारिक यथार्थवाद प्रदर्शित किया, उसी कारण उन्हें 'लौह पुरुष' (Iron Man of India) कहा गया। उनका यह संकल्प ही आधुनिक भारत के राजनीतिक नक्शे की गारंटी बना।
इस प्रकार, चंद्रगुप्त मौर्य भारत के भौगोलिक और राजनीतिक एकीकरण के आदर्श थे, जिसका सफल अनुकरण सरदार पटेल ने आधुनिक काल में किया।
 अशोक महान की प्रतिमूर्ति: प्रशासनिक और नैतिक स्थिरता*

रियासतों के एकीकरण के बाद, सरदार पटेल ने सम्राट अशोक महान के पदचिह्नों पर चलते हुए शासन में स्थायित्व लाने का कार्य किया। अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद अपनी सैन्य शक्ति को त्याग कर धम्म (नैतिक कानून और लोक कल्याण) के माध्यम से एक विशाल साम्राज्य को स्थायी एकता और न्याय प्रदान किया।
पटेल ने भी आधुनिक भारत की एकता को स्थायी बनाने के लिए अशोक के समान ही प्रशासनिक नींव पर ध्यान केंद्रित किया:
 *'इस्पात ढाँचा' (Steel Frame):*
 अशोक ने अपने साम्राज्य में समान कानून और प्रशासन बनाए रखने के लिए स्तंभ लेखों और धर्म महामात्यों का उपयोग किया। पटेल ने इसी उद्देश्य के लिए अखिल भारतीय सेवाओं (IAS/IPS) को आधुनिक भारत का 'इस्पात ढाँचा' कहा। ये सेवाएँ केंद्र और राज्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं और देश की एकता को प्रशासनिक रूप से बनाए रखने का कार्य करती हैं।
 *आंतरिक सुरक्षा और व्यवस्था:*
 गृहमंत्री के रूप में, पटेल ने देश के विभाजन के बाद की अराजकता, सांप्रदायिक हिंसा और आंतरिक अव्यवस्था को नियंत्रित किया। यह कार्य अशोक द्वारा स्थापित सुदृढ़ और न्यायपूर्ण केंद्रीय प्रशासन की भावना को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य प्रजा की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना था।
 *लोक कल्याणकारी विचार:*
 पटेल ने भूमि सुधारों को प्राथमिकता दी और किसानों व मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया (जैसे बारडोली सत्याग्रह)। यह दृष्टिकोण अशोक के प्रजा के नैतिक और भौतिक उत्थान पर बल देने वाले शासन की आधुनिक अभिव्यक्ति थी।

आधुनिक युग में पटेल का भारत और भारतीय पर प्रभाव सरदार पटेल का योगदान केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत की पहचान है, राष्ट्रीय एकता का स्थायी स्तंभ:*

 पटेल ने भारत को वह भौगोलिक और राजनीतिक एकता दी, जो आज इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उनके बिना, भारत कई टुकड़ों में बिखर सकता था।
 *प्रशासनिक जवाबदेही:*
 अखिल भारतीय सेवाओं के उनके सशक्तिकरण ने भारत में एक कुशल, तटस्थ और जवाबदेह नौकरशाही की नींव रखी, जो लोकतंत्र को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण है।
 *प्रेरणा स्रोत:*
 उन्हें राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर) के रूप में याद किया जाता है। गुजरात में उनकी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी  विश्व में एकता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में स्थापित है।
 भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल ने चंद्रगुप्त मौर्य के समान अखंड राष्ट्र के निर्माण का कार्य किया और उस निर्मित राष्ट्र को अशोक महान के समान स्थायी प्रशासनिक और नैतिक आधार प्रदान किया। उन्होंने प्राचीन भारतीय गौरव को आधुनिक राष्ट्रीयता के रूप में पुनर्जीवित किया।

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