आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन विषय पर एक किसान गोष्ठी का आयोजन।

बृज बिहारी दुबे
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वाराणसी सस्य विज्ञान संभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में डॉ संजय सिंह राठौर, परियोजना समन्वयक के मार्गदर्शन में चल रही परियोजना "भारत में प्रमुख फसल प्रणाली की उत्पादकता को स्थाई रूप से बढ़ाने और पर्यावरण पदचिन्हों को कम करने के लिए किंवित जैविक खादों का मूल्यांकन, प्रचार–प्रसार और विस्तार" के तत्वाधान में 'किंवित जैविक खाद से समृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन विषय पर एक किसान गोष्ठी का आयोजन 18 अक्टूबर 2025  कृषि विज्ञान केंद्र, वाराणसी में सफलतापूर्वक किया गया।  यह परियोजना मारुति सुजुकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के आर्थिक सहयोग से शुरू हुआ है। किंवित जैविक खाद जिसको फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद या संक्षेप में FOM कहते हैं, यह एक जैविक रूप से स्थिर उत्पाद है जो नियंत्रित वायवीय या अवायवीय स्थितियों में पशु गोबर, पौधों के अवशेष (धान की पराली) या कृषि उप–उत्पादों से जैसे कार्बनिक अपशिष्टों  के सूक्ष्मजीविय किण्वन से प्राप्त होता है। किण्वन प्रक्रिया के दौरान जटिल कार्बनिक यौगिक का विघटन होता है जिससे यह सरल और जैव उपलब्ध पोषक तत्वों में बदल जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता और सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ाने में मदद करते हैं। एफ•ओ• एम• के बहुत लाभ है जैसे कि यह खाद धीमी गति से लगातार पौधों को पोषक तत्व  प्रदान करता है, साथ ही पोषक तत्वों के अवशोषण की दक्षता में भी सुधार करता है। यह मृदा की संरचना को सुधार कर बेहतर पोषक तत्व अवशोषण करने के लिए तथा मजबूत जड़ विकास को भी बढ़ावा देता है। मिट्टी जनित रोगों और कीटों के प्रभाव को कम करने में भी यह मदद करता है साथ ही बलुई मिट्टी की जलधारण क्षमता को भी बढ़ता है। इसके प्रयोग से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कटौती होती है। इस गोष्ठी में लगभग 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया तथा फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद की खूबियों को जाना, जो की जैविक खेती में यह पोषक तत्व प्रबंधन के लिए एक उचित और उपयुक्त विकल्प के रूप में कार्य करेगा साथ ही रासायनिक उर्वरकों के प्रति किसानों की निर्भरता को भी कम करेगा। गोष्ठी का आयोजन मुख्य रूप से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के परियोजना समन्वयक डॉ संजय सिंह राठौर, अन्वेषक डॉक्टर राजीव कुमार सिंह तथा  सह–अन्वेषक डॉक्टर प्रवीण कुमार उपाध्याय ने किया। इस संगोष्ठी में  श्री अमित जायसवाल (उपनिदेशक कृषि वाराणसी), डॉक्टर नवीन कुमार सिंह (अध्यक्ष), डॉक्टर अमितेश कुमार सिंह (विषय वस्तु विशेषज्ञ), डॉ राहुल कुमार सिंह (विषय वस्तु विशेषज्ञ), डॉ श्री प्रकाश सिंह  (विषय वस्तु विशेषज्ञ), डॉ मनीष पांडे (विषय वस्तु विशेषज्ञ), डॉ राणा पीयूष सिंह (विषय वस्तु विशेषज्ञ), डॉ प्रतीक्षा सिंह (विषय वस्तु विशेषज्ञ) और डॉक्टर पूजा सिंह (विषय वस्तु विशेषज्ञ) कृषि विज्ञान केंद्र, वाराणसी, उत्तर प्रदेश  ने भाग लिया और FOM तथा अन्य कृषि तकनीकी के बारे में जानकारी दी। इस गोष्ठी को आयोजित करने में संस्थान के निदेशक और संयुक्त निदेशक (शोध) साथ ही परियोजना सह–अन्वेषक डॉक्टर कपिला शेखावत, डॉ दिवाकर महनता, डॉक्टर सुभाष बाबू, डॉक्टर ऋषि राज, डॉ विशाल त्यागी, डॉ मोना नगरगड़े, डॉक्टर अर्जुन सिंह और परियोजना से जुड़े स्टाफ  आदित्य सिंह और अन्य का भरपूर सहयोग मिला।

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