नवादा विधि महाविद्यालय में छात्रों से अवैध वसूली पर जांच का आदेश।

बृज बिहारी दुबे
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    गया से ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट।
 
गया जी।नवादा विधि महाविद्यालय में अवैध वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़ी खबर का असर हुआ है। राज्यपाल सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। इसकी जिम्मेदारी मगध विश्वविद्यालय को सौंपी गई है और पत्रकार को भी इस संबंध में ईमेल से जानकारी दी गई है।
ओरल परीक्षा के नाम पर छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन मौखिक परीक्षा (ओरल एग्जाम) और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं के नाम पर उनसे पैसे वसूलता है। परीक्षा से लेकर अंक तालिका तक,हर स्तर पर दबाव बनाकर रकम देने की मजबूरी छात्रों पर डाली जाती है। इस मामले में खास बात यह रही कि ज्यादातर छात्र चुप्पी साधे रहे। केवल एक छात्र ने हिम्मत कर आवाज उठाई। कारण यह है कि अधिकांश छात्र बाहरी हैं और इन लोगों ने एडमिशन के नाम पर पहले ही डेढ़ लाख रुपये तक चुका चुके हैं। ऐसे में वे नौ हजार की अतिरिक्त वसूली पर सवाल उठाने से डरते हैं,क्योंकि उन्हें डिग्री मिलने का भय सताता है। मगध विश्व विद्यालय को जांच की जिम्मेदारी दी गई है,लेकिन यह फैसला सवालों के घेरे में है। कारण साफ है कि डी.एन. मिश्रा,जो नवादा विधि महाविद्यालय के संस्थापक-संचालक हैं, वो वर्तमान में मगध विश्व विद्यालय के लॉ फैकल्टी के डीन भी हैं। यानी जिस संस्थान के खिलाफ जांच होनी है, उसी से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े व्यक्ति विश्व विद्यालय के उच्च पद पर बैठे हुए हैं। इस स्थिति में छात्रों और जानकारों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और कारगर होगी या नहीं होगी,यह सबसे बड़ा सवाल है। यह मामला अब हितों के टकराव का रूप ले चुका है। छात्रों व उनके पैरेंट्स का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष रूप से हुई तो शिक्षा जगत में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार होगा। लेकिन यदि पक्षपात हुआ,तो पूरी प्रक्रिया का भरोसा कमजोर हो जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद धूमिल हो जाएगी।
राज्यपाल सचिवालय की पहल को सही दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या विश्वविद्यालय अपने ही डीन और संबद्ध संस्थान पर पारदर्शी व निष्पक्ष जांच कर पाएगा या नहीं।

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