गयाजी नगर जिला प्रशासन की अतिक्रमण कारियों के साथ अनैतिक गठजोड़ चिंता का विषय।

बृज बिहारी दुबे
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 आज गयाजी सदर एसडीओ से वर्षों से अतिक्रमित डेल्हा ओवरब्रिज नाजरथ एकेडमी के समीप और ओवर ब्रिज के दाईं ओर सरकारी जमीन एवं नाले पर रोहिंग्या अतिक्रमण करियों द्वारा वर्षों से सरकारी भूमि पर अवैध रूप से घर बनाकर रहने के संबंध में बात किया तो उन्होंने इस विषय पर कोई संतोष जनक जबाव नहीं दिया और मेरे फोन को काट दिया। जब मैंने तुरंत दुबारा उन्हें फोन किया तो मेरे फोन का कोई उतर  नहीं दिया साथ ही अपना सरकारी नंबर भी नहीं उठाया। इसके पहले मैने गया के जिलाधिकारी को भी उनके सरकारी नंबर पर     फोन किया लेकिन वे महोदय भी मेरी फोन नहीं उठा सके,इससे जाहिर होता है कि गया जिला की संपूर्ण प्रशासन की पूरी गठजोड़ एवं मिलीभगत इन अवैध रोहिंग्या अतिक्रमणकारियों के साथ है। इसके पूर्व भी मैं कई बार इस विषय पर सदर एसडीओ से बात किया हूं,लेकिन सिर्फ सांत्वना के अलावे कोई कारवाई इस अतिक्रमण पर नहीं किया गया। इससे यह साबित होता है कि गया का जिला प्रशासन नहीं चाहता है कि इस सरकारी भूमि पर बसे इन अवैध,गैर कानूनी रोहिंग्या अतिक्रमण कारियों को हटाया जाए। ज्ञातव्य हो कि जिस जगह पर ये रोहिंग्या अतिक्रमण कारि बसे हुए हैं,उस जगह से प्रतिदिन लाखों की संख्या में गाड़ियों की आवागमन होती है। यातायात सुरक्षा की ख्याल से यह सड़क मार्ग अति संवेदनशील है,बावजूद इसके इस सरकारी भूमि पर इन लोगों ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है,और जिला प्रशासन कान में तेल डालकर किसी बड़ी दुर्घटना होने की इंतजार कर रही है। आए दिन यहां वाहन दुर्घटना होने की संभावना काफी बलवती रहती है। क्योंकि इन अतिक्रमण कारियों के बच्चे,पुरुष महिलाएं,बुजुर्ग सभी लोग  इस सड़क पर बैठकर अपना दैनिक काम सुबह शाम करते पाए जाते हैं। इनके छोटे बच्चे हमेशा सड़क के बीचों बीच और दोनों तरफ खेलते पाए जाते हैं,जबकि यातायात की दृष्टि से डेल्हा ओवर ब्रिज के नीचे का यह सड़क मार्ग अति संवेदनशील और व्यस्तम मार्गों में से एक है। दूसरी ओर गया जिला प्रशासन की एक और निर्लज्जता देखिए कि इन अतिक्रमण कारियों को बिजली पानी की कनेक्शन भी दे दिया गया है,शायद ये भी मुफ्त ही हो जो जांच की विषय है। कई बार इस स्थान पर वाहन चालकों के  साथ इन अतिक्रमण कारियों द्वारा मारपीट भी किया गया है,और चोरी गुंडई की घटना भी सामने आई है,फिर भी जिला प्रशासन गयाजी इस मामले में उदासीन और खामोश है। पता नहीं किन किन राजनीतिक आकाओं के इशारे पर गयाजी की जिला प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है,ये भी एक गहन जांच की ही विषय है।



रिपोर्ट अमरेंद्र कुमार 

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