प्रयागराज। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने गुरूवार को मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, अपर जिलाधिकारी नजूल संजय पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी नगर सत्यम मिश्र, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम श्री अविनाश यादव, अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय प्रेम नारायण प्रजापति के साथ टीम बनाकर स्वरूपरानी चिकित्सालय का औचक निरीक्षण कर मरीजों को उपलब्ध हो रही सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए सभी सम्बंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है।
जिलाधिकारी ने स्वरूपरानी चिकित्सालय में निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों के अपने निर्धारित स्थान पर अनुपस्थित पाये जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और प्रिंसिपल एवं सम्बंधित विभागाध्यक्षों को चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निरीक्षण के समय अनुपस्थित चिकित्सकों एवं कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोके जाने एवं उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों के विरूद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जायेगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया, जिसमें ट्रामासेंटर जी-2 के ड्यूटी पर रोस्टर के अनुसार तैनात डॉ0 राजेश कुमार उपस्थित रहे तथा डॉ0 सत्य प्रकाश अनुपस्थित मिले। रिसेप्शन पर रात्रि शिफ्ट के भीमसेन उपस्थित पाये गये जबकि प्रातः 08ः00 बजे मार्निंग शिफ्ट में तैनात पूनम श्रीवास्तव देर से उपस्थित हुई। जिलाधिकारी ने इमरजेंसी वार्ड में शिफ्टवार तैनात चिकित्सकों के ड्यूटी रूम के बाहर ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों के शिफ्टवार नाम, मोबाइल नम्बर व समय स्पष्ट रूप से लिखकर सूचना चस्पा कराये जाने के लिए कहा। इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों को किसी सुविधा के लिए इधर-उधर भटकना न पडे और उन्हें सभी जानकारी उपलब्ध हो सके, इसके लिए वहां पर हेल्पडेस्क बनाये जाने के निर्देश दिया है।
जिलाधिकारी ने रिसेप्शन पर रखे गये सुझाव एवं शिकायत पेटी को खुलवाकर देखा, तो शिकायत पेटी में कूड़ा भरा मिला और एक शिकायती पत्र भी मिला, जिसमें डॉयलिसिस सेंटर में प्रयोग होने वाला सामान एवं दवाएं बाहर से मंगाये जाने की शिकायत करते हुए चिकित्सालय से उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया गया था। जिलाधिकारी ने स्वरूपरानी चिकित्सालय के सभी ब्लाकों एवं जनपद के सभी प्रमुख चिकित्सालयों एवं सीएचसी, पीएचसी पर भी शिकायत/सुझाव पेटी रखवाये जाने एवं उसकी चाभी को सुरक्षित रखे जाने एवं प्रत्येक 15 दिन पर उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में शिकायत पेटी को खोलकर सुझावों एवं शिकायतों पर प्रभावी एवं उचित कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने सभी तहसीलों एवं विकास खण्ड कार्यालयों में भी इस प्रकार की व्यवस्था बनाये जाने के निर्देश दिए है।
इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एमआरआई कक्ष, सिटी स्कैन, एक्सरे व पैथौलॉजी कक्ष का निरीक्षण करते हुए उन्होंने एक्सरे, सिटी स्कैन, पैथोलॉजी में मशीनों की क्रियाशीलता एवं प्रतिदिन कितनी जांचे होती है, के बारे में जानकारी ली। सिटी स्कैन कक्ष में बुधवार को कुल 50 जांच हुई थी और आज निरीक्षण के समय प्रातः 09ः00 बजे तक 18 सिटी स्कैन हुए थे। उन्होंने सभी जांच रिपोर्टों को निर्धारित शुल्क चार्ज करते हुए समय से उपलब्ध कराये जाने एवं सभी जांच रिपोर्टों के लिए निर्धारित शुल्क को जांच कक्ष के बाहर चस्पा कराये जाने के लिए कहा है। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड के रिकवरी रूम वार्ड में जाकर प्रत्येक भर्ती मरीज से मिलकर दुर्घटना या बीमारी के कारण की जानकारी लेते हुए उनका कुशलक्षेम जाना और चिकित्सक कब राउंड पर आये थे, दवाएं बाहर से तो नहीं मंगाई जा रही हैं, इलाज में कोई असुविधा तो नहीं है, के बारे में पूछा, जिसपर संतोषजनक उत्तर प्राप्त हुआ।
जिलाधिकारी ने सर्जरी ओपीडी का निरीक्षण किया, जहां पर सर्जरी ओपीडी में रखी हुई कुर्सी की बुनाई टूटी हुई मिली, जिसे उन्होंने सही कराये जाने के साथ सभी कक्षों में सामानों को व्यवस्थित रखे जाने एवं साफ-सफाई कराये जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने वहां पर मरीजों एवं तीमारदारों से वार्ता कर चिकित्सालय के द्वारा उन्हें उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। चिकित्सालय में आयें हुए तीमारदार के द्वारा बताया गया कि उसके पिता के अल्ट्रासाउण्ड की डेट एक माह बाद 27 सितम्बर दी गयी है और हर बार अल्ट्रासाउण्ड के लिए एक माह से अधिक की ही डेट मिलती है, जिसपर जिलाधिकारी ने प्रधानाचार्य से अल्ट्रासाउंड मशीनों की संख्या बढ़ाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है।
जिलाधिकारी ने कैश काउंटर पर यूजर चार्जेज को जमा करने हेतु कैश के साथ-साथ ऑनलाइन पेमेंट व क्यूआर कोड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए है। उन्होंने चिकित्सकों की विजिट सीट बनाये जाने के लिए कहा है। जिलाधिकारी ने अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करने के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पायी गयी है, उनकों टाइमलाइन बनाकर शीघ्रता के साथ दूरे करने के निर्देश प्रधानाचार्य व एसआईसी को दिए गए है, जिससे कि यहां पर आने वाले मरीजों को अच्छी व्यवस्था का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायत प्राप्त होने पर सम्बंधित के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह ने अपर जिलाधिकारी नगर एवं अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम के साथ अस्पताल परिसर, वार्डों, शल्य कक्ष, प्रसूति कक्ष, औषधि भण्डार, परीक्षण प्रयोगशाला, रोगी परामर्श कक्ष का निरीक्षण किया गया। ओपीडी के निरीक्षण के समय दंत विभाग में डॉ0 शरद चंद्र, मेडिसिन में डॉ0 सत्यम अग्रवाल, ईएनटी विभाग डॉ0 आनंद प्रकाश, डरमेटोलॉजी विभाग में डॉ0 एस0के0 ओझा, आर्थोपेडिक विभाग में डॉ0 अहमद हसन, मनोचिकित्सा विभाग में डॉ0 शैलेन्द्र कुमार मिश्रा, क्षय रोग विभाग में डॉ0 ए0डी0 शुक्ला रोस्टर के अनुसार अनुपस्थित पाये गये। मेडिसिन भण्डार के औचक निरीक्षण में Paratof मेडिसिन की उपलब्धता कम्प्यूटर में 139 थी जबकि मौके पर मात्र 100 एवं सिटरीजीन की उपलब्धता 80 के सापेक्ष 75 पायी गयी। आपातकालीन सेवाओं के निरीक्षण में जीवन रक्षक दवाओं एवं उपकरणों की उपलब्धता सीमित पायी गयी। प्रसूती कक्ष एवं शिशु वार्ड के निरीक्षण के समय कोई प्रभारी चिकित्सक उपस्थित नहीं पाया गया। प्री-लेवर रूम में एसी नहीं लगाया गया है और पर्याप्त साफ-सफाई भी नहीं पायी गयी एवं कुछ मशीनों के मरम्मत की भी आवश्यकता है।
अपर जिलाधिकारी नजूल के द्वारा पुरानी बिल्डिंग के वार्डों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय स्टाफ ड्रेस कोड में नहीं था। अल्ट्रा साउण्ड कक्ष 8.45 बजे तक बन्द पाया गया, एक्स-रे कक्ष खुला था परंतु कोई उपस्थित नहीं था। अल्ट्रसाउण्ड, एक्सरे, एम0आर0आई0 सेन्टर पर मरीजों के प्रबन्ध की कोई व्यवस्था नहीं है। अल्ट्रासाउण्ट हेतु 10-15 दिन व एम0आर0आई0 हेतु 1-1) महीनों की डेट दी जा रही है, जिसके विवरण का कोई रख रखाव नहीं है। निरीक्षण के समय प्रातः 08ः00 बजे पुरानी बिल्डिंग के वार्डों में कुछ अधिकारी, कर्मचारी व नर्सिंग स्टाफ अनुस्थित पाये गये और कुछ देर से उपस्थित हुए।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के पश्चात प्रिंसिपल व एसआईसी को चिकित्सालय में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराये जाने एवं अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। उन्होंने साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिए जाने एवं अन्य व्यवस्थाओं को चुस्त-दूरूस्त रखने, पेयजल, अस्पताल में आने वाले मरीजों को समुचित उपचार तथा समय से ओपीडी में बैठकर चिकित्सकों के द्वारा उनका उपचार किये जाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने मरीजों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित हो एवं सभी सुविधाएं उपलब्ध हो सके, के निर्देश दिए है। उन्होंने चिकित्सालय परिसर में इमरजेंसी वार्ड तक जाने वाली सड़क के मरम्मत और चौड़ीकरण के कार्य को यूपीपीसीएल के सम्बंधित अधिकारियों जल्द से जल्द पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने कहा कि निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पायी गयी है, उसपर प्रभावी कार्यवाही करते हुए उन्हें सुधारा जाये। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट राम आसरे