वाराणसी बाबू जगत सिंह कोठी में आयोजित व्याख्यान में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार ने कहा कि अब जब भी सारनाथ की बात होगी, बुद्ध और बाबू जगत सिंह की चर्चा भी होगी। कार्यक्रम का विषय था 1787 सारनाथ की पहचान और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1799 डॉ (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने 1787 से 1799 तक काशी की बगावत का क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत किया। कला इतिहास की प्रोफेसर ज्योति रोहिल्ला राणा ने कहा कि शोधकताओं को उपनिवेशवाद और अंग्रेजीयत के प्रभाव से मुक्त होकर नए तथ्यों और प्रमाणों की खोज करनी चाहिए। शोध समिति के सदस्य प्रोफेसर राणा पीबी सिंह ने पुराने शिलापट्ट पर अंकित दो गलत तथ्यों-बाबू जगत सिंह को महाराज चेत सिंह का दीवान बताना और उत्खनन सामग्री के नष्ट होने का उल्लेख किया। नए शोध के आधार पर अब सारनाथ में नया शिलापट्ट स्थापित किया गया है। कार्यक्रम में मंचासीन व्यक्तियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्रम देकर स्वागत किया गया। संचालन अशोक आनंद ने किया, स्वागत उद्बोधन सुभाष कपूर, और
धन्यवाद ज्ञापन सौरभ पांडेय द्वारा दिया। कार्यक्रम मे मुख्य रूप से पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह, प्रोफेसर ध्रुव कुमार, प्रोफेसर हरिकेश बहादुर सहित शिक्षा एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
